शनिवार (1 अगस्त, 2026) को आंध्र प्रदेश में नए बने अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Alluri Sitarama Raju International Airport) के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का स्वागत करने के लिए 13 हज़ार से ज़्यादा आदिवासी महिलाओं और छात्राओं ने गुलाबी और हरे रंग के पारंपरिक कपड़ों में एक साथ मिलकर ‘धिमसा’ नृत्य (Dhimsa dance) किया.
दूर-दराज के पहाड़ी गांवों में फसल कटाई, त्योहारों और सामुदायिक जीवन के जश्न के तौर पर शुरू हुई यह परंपरा तब दुनिया भर में मशहूर हो गई, जब इस बड़े पैमाने पर किए गए डांस को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने सबसे बड़े धिमसा डांस के तौर पर मान्यता दी. यह भारत की सबसे पुरानी आदिवासी डांस परंपराओं में से एक के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी.
वहां मौजूद प्रतिनिधियों ने आंध्र प्रदेश की आदिवासी कल्याण मंत्री गुमिद्दी संध्या रानी को इसका आधिकारिक सर्टिफ़िकेट सौंपा.
यह सम्मान आंध्र प्रदेश सरकार के आदिवासी कल्याण विभाग और हज़ारों प्रतिभागियों को दिया गया.
धिमसा नृत्य की खासियत
उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के आदिवासी समुदायों के लिए ‘धिमसा’ उनकी पहचान का एक जीवंत रूप है.
मुख्य रूप से वाल्मीकि, बगता, कोंडाडोरा, गडाबा, जटापु, कोंडा सवारा और पोरजा जैसी जनजातियों की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला यह नृत्य अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले, पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम और अनाकापल्ली के कुछ हिस्सों के ‘एजेंसी इलाकों’ के सामाजिक ताने-बाने में गहराई से रचा-बसा है.
बुवाई और कटाई से लेकर शादियों और सालाना त्योहारों तक, समुदाय के हर बड़े मौके पर धिमसा नृत्य के सुंदर गोलाकार घेरों के ज़रिए अपनी भावनाएं ज़ाहिर की जाती हैं.
नृविज्ञानियों का मानना है कि यह नृत्य पूर्वी घाट की पहाड़ी और जंगली इलाकों में खेती-बाड़ी से जुड़ी ज़िंदगी के सामूहिक जश्न के तौर पर विकसित हुआ.
माना जाता है कि ‘धिमसा’ शब्द एक आदिवासी अभिव्यक्ति से आया है, जिसका अर्थ है तालमेल के साथ हिलना-डुलना या लयबद्ध समूह नृत्य; हालाँकि, अलग-अलग समुदायों में इसकी भाषाई व्याख्याएँ अलग-अलग हो सकती हैं.
धिमसा को लगभग पूरी तरह से मौखिक परंपरा के ज़रिए ही संजोकर रखा गया है. इसमें हर पीढ़ी औपचारिक शिक्षा के बजाय बड़ों को देखकर ही इसे सीखती है.
धिमसा की सबसे खास बात इसकी सादगी है. महिलाएं आमतौर पर कंधे से कंधा मिलाकर या एक-दूसरे की कमर पकड़कर खड़ी होती हैं और नपे-तुले कदमों के साथ गोल घेरे में घूमती हैं, जो प्रकृति की लय को दर्शाता है.
पुरुष इस प्रस्तुति के दौरान डप्पू, मोरी, तुडुमु और अन्य पारंपरिक ड्रम जैसे स्थानीय ताल-वाद्य यंत्र बजाकर साथ देते हैं, जबकि लोक गीतों में जंगल, नदियों, खेती, प्रेम और सामूहिक श्रम की कहानियाँ सुनाई जाती हैं.
अलग-अलग मौकों पर इसके विभिन्न रूप, जैसे – बोडा धिमसा, गोड्डी बेला, कुंडा धिमसा और बाघ धिमसा प्रस्तुत किए जाते हैं, जो इस परंपरा की अद्भुत विविधता को दर्शाते हैं.
कई दशकों में धिमसा नृत्य पहाड़ियों से बाहर निकलकर दूर-दूर तक पहुँचा है। यह आंध्र प्रदेश का सांस्कृतिक दूत बन गया है और राज्य के त्योहारों, गणतंत्र दिवस समारोहों, पर्यटन अभियानों और राष्ट्रीय आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है.
फिर भी संस्कृति के जानकारों ने बार-बार आगाह किया है कि भले ही मंच पर होने वाले प्रदर्शनों से इस नृत्य की पहचान बढ़ी है लेकिन इसका असली सामाजिक महत्व गांव के समुदाय में ही है, जहां परफ़ॉर्मेंस की बारीकियों या परफ़ेक्शन से ज़्यादा लोगों की भागीदारी मायने रखती है. इसके मूल रूप में कोई दर्शक नहीं होते, हर कोई घेरे में शामिल हो जाता है.
इसलिए गिनीज़ की इस मान्यता का स्वागत सिर्फ़ एक संख्यात्मक उपलब्धि के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के तौर पर किया गया है.
हज़ारों कलाकारों ने भोगपुरम में एक साथ मिलकर ‘धिमसा’ नृत्य पेश किया, जिसे दुनिया भर में पहचान मिली और जिसने एक पारंपरिक सामुदायिक नृत्य को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन में बदल दिया.
‘द इंडियन ट्राइबल’ के मुताबिक, अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन से पहले हुए इस नृत्य प्रस्तुति में ज्यादातर डांसर इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) के तहत आने वाले स्कूलों में पढ़ने वाले 8वीं, 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्र थे, जो पडेरू, सीथांपेटा, पार्वतीपुरम और रामपाचोडावरम जैसे आदिवासी इलाकों से आए थे.
उन्होंने 433 गोल घेरों में यह डांस किया, जिनमें से हर घेरे में 50 डांसर शामिल थे. इस दौरान एयरपोर्ट परिसर में पारंपरिक डप्पू ड्रम की थाप गूंज रही थी.
PM मोदी ने की धिमसा नृत्य की तारीफ
एक दिन बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस शानदार नज़ारे की तारीफ़ की.
उन्होंने पोस्ट में लिखा, “भोगपुरम एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में 13 हज़ार से ज़्यादा छात्रों द्वारा किए गए जोश भरे ‘धिमसा डांस’ ने मेरा दिल जीत लिया. यह शानदार परफॉर्मेंस आंध्र प्रदेश के लोगों के स्नेह, राज्य की सांस्कृतिक भव्यता और खासकर हमारे आदिवासी समुदायों की महान परंपराओं का सबूत है.”
शनिवार को एयरपोर्ट का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश, खासकर उत्तरी क्षेत्र के विकास के लिए “रनवे” बनेगा. यह आंध्र के युवाओं के बेहतर भविष्य का लांच पैड है. मैं आंध्र प्रदेश के लोगों को बहुत बधाई देता हूं
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह चंद्रबाबू नायडू की विशेषता है कि उन्होंने दो क्षितिजों को छुआ है. एक तरफ ऊंचे आसमान को छूने वाली व्यवस्था यानी एयरपोर्ट का निर्माण और दूसरी तरफ यहां की आदिवासी बहनों द्वारा धिमसा नृत्य का विश्व रिकॉर्ड बनाना. मैं चंद्रबाबू के इस विजन की सराहना करता हूं.
भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट के बाद इस साल चालू होने वाला देश का दूसरा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है. जेवर एयरपोर्ट पर 15 जून को कमर्शियल उड़ानें शुरू हुई थीं.
आंध्र प्रदेश का मिला 7वां एयरपोर्ट
भोगपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश का 7वां एयरपोर्ट है. इस नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 17 अगस्त को फ्लाइट ऑपरेशन्स की शुरुआत होगी. इस एयरपोर्ट की कुल लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये है. जिसके बारे में राज्य सरकार का कहना है कि यह उत्तरी आंध्र को एक प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्र में बदल देगी.
इस एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 60 लाख है, जिसे बढ़ाकर 4 करोड़ तक किया जा सकता है.
एयरपोर्ट का नाम स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर रखा गया
जीएमआर ग्रुप द्वारा विकसित इस हवाई अड्डे का नाम स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर रखा गया है.
पहले चरण में इसकी क्षमता प्रति वर्ष 60 लाख यात्रियों की होगी और दीर्घकालिक विस्तार योजना के तहत इसकी क्षमता को बढ़ाकर प्रति वर्ष 400 लाख यात्रियों तक करने का लक्ष्य है. वाणिज्यिक उड़ानें 17 अगस्त से शुरू होने वाली हैं.
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस हवाई अड्डे को औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात, कौशल विकास और उत्तरी आंध्र प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में प्रस्तुत किया है.
(Image credit: PTI)

