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केन-बेतवा परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने जबरन हटाया

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए आदिवासियों का दो हफ्ते से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को रविवार (19 जुलाई, 2026) सुबह पुलिस ने जबरन समाप्त किया.

फिलहाल पुलिस ने आंदोलन स्थल को खाली करा दिया है. वहीं 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी अमित भटनागर को अस्पताल ले जाया गया.

रविवार सुबह की यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा शनिवार (18 जुलाई, 2026) को की गई ऐसी ही एक कार्रवाई के एक दिन बाद हुई है, जिसमें पुलिस ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से ज़बरदस्ती हटाकर अस्पताल पहुँचाया था.

दरअसल, छतरपुर जिले के कूपी गांव के बाराना नदी के किनारे किसान और आदिवासी  पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. वह अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे थे.

लेकिन रविवार सुबह-सुबह मौके पर भारी संख्या में पहुंचे पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रदर्शनकारियों को जबरन धरना स्थल से हटा दिया.

हालांकि, कई प्रदर्शनकारियों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया और पुलिस पर ज़बरदस्ती हटाने और महिलाओं के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा था और आंदोलन स्थल सुरक्षित नहीं रह गया था. इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का फैसला लिया गया.

छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने ‘द हिंदू’ को बताया कि इलाके में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिससे नदी का जलस्तर बढ़ गया था. उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई, क्योंकि प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग भी शामिल थे.

पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बनाए गए अस्थायी ढांचे और नदी के भीतर प्रतीकात्मक रूप से बनाई गई चिताओं को भी हटा दिया. आंदोलनकारी इन्हीं चिताओं पर लेटकर और गले में फंदा डालकर ‘न्याय दो, वरना मार दो’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर रहे थे.

हालांकि, कई प्रदर्शनकारियों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ महिलाएं पुलिस कार्रवाई का विरोध करती दिख रही हैं.

कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों को महिलाओं को किनारे से खींचते हुए भी देखा जा सकता है.

छतपुर कलेक्टर ने कहा- किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ये कदम उठाया

छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने ‘द हिंदू’ को बताया कि इलाके में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिससे नदी का जलस्तर बढ़ गया था. उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई, क्योंकि प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग भी शामिल थे.

जायसवाल ने बताया कि अमित भटनागर को बिजावर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है.

उन्होंने कहा, “हमें मौसम विभाग से आने वाले दिनों में और बारिश होने की जानकारी मिली थी. इसीलिए पुलिस सुबह करीब 5 बजे मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. लेकिन वे नदी के बीच जाकर खड़े हो गए इसलिए पुलिस को उन्हें घेरकर बाहर निकालना पड़ा.”

उन्होंने आगे बताया कि प्रदर्शनकारियों को बसों से पन्ना ज़िले में उनके गांवों तक पहुंचाया गया.

इसके अलावा कलेक्टर जायसवाल ने मारपीट और ज़बरदस्ती हटाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमने उनकी चिंताओं को नोट किया है और पन्ना प्रशासन के साथ साझा किया है. डॉक्टर अमित भटनागर की सेहत पर भी नज़र रख रहे हैं.”

वहीं छतरपुर के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (ASP) आदित्य पटले ने कहा, “वह (अमित भटनागर) कई दिनों से यहां विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे इसलिए पुलिस और प्रशासन के साथ डॉक्टरों की एक टीम उनके बेसिक मेडिकल चेक-अप के लिए यहां आई थी. वह खुद भी इसमें दिलचस्पी ले रहे थे और उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया था कि उनकी सेहत थोड़ी बिगड़ रही है. इसलिए, पुलिस बल, डॉक्टरों और प्रशासन की एक टीम यहां आई और उन्हें शांतिपूर्वक अस्पताल भेज दिया गया.”

ASP पटले ने बताया कि विरोध स्थल पर मौजूद महिलाओं को बसों से उनके घरों तक पहुंचाया गया.

उन्होंने कहा, “यहां एक पुल बन रहा है और बारिश के कारण नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है. यह जगह सुरक्षित नहीं है इसलिए उन्हें यहां से हटाया गया.”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों का सहयोग किया.

हालांकि, घटनास्थल से कुछ वीडियो सामने आए हैं जिनमें प्रदर्शनकारी, जिसमें ज़्यादातर महिलाएं शामिल हैं, तेज़ बहाव के बीच नदी पार करने की कोशिश में एक-दूसरे को पकड़े हुए दिख रही हैं, जबकि पुलिसकर्मी उनसे किनारे आने के लिए कह रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों को अधिकारियों द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने का आरोप लगाते हुए भी सुना गया.

अमित भटनागर ने जबरदस्ती अस्पताल ले जाने की बात कही

उधर अस्पताल में अमित भटनागर ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई उस दिन हुई जब वह मुआवज़े की प्रक्रिया से जुड़े “400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा” करने की योजना बना रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें ज़बरदस्ती अस्पताल ले गई थी.

उन्होंने पुलिस के इस दावे को खारिज किया कि उन्हें उनकी सहमति से लाया गया था और कहा, “मेरी सेहत इतनी खराब नहीं थी. मेरी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है. मैं इसे नहीं तोडूंगा. अगर मुझ पर दबाव डाला गया, तो मैं पानी भी नहीं पीऊंगा और सांस भी नहीं लूंगा.”

उन्होंने पुलिस और अधिकारियों पर महिला प्रदर्शनकारियों के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप भी लगाया.

विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने “हर असहमति वाली आवाज़ को दबाना ही अपना शासन का तरीका बना लिया है.”

कांग्रेस नेता ने अमित भटनागर समेत हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई की मांग की और साथ ही केन-बेतवा प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की.

कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर कहा, “लोकतंत्र में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है लेकिन बीजेपी सरकार ने हर असहमति वाली आवाज़ को दबाना ही अपना शासन का मॉडल बना लिया है. सरकार उन प्रदर्शनकारियों से डरती है जो सरकार से नहीं डरते. सरकार ने बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुना.”

सिंघार ने मध्य प्रदेश में हुई कार्रवाई की तुलना दिल्ली पुलिस द्वारा श्री वांगचुक के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई से करते हुए कहा, “BJP सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र लाठी और गिरफ़्तारियों से नहीं, बल्कि बातचीत और संविधान से चलता है. जिस तरह से लगातार दो दिनों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कार्रवाई की गई है, वह साफ़ संकेत है कि देश को लोकतंत्र की ओर नहीं, बल्कि तानाशाही और डर के माहौल की ओर धकेला जा रहा है.”

क्या है पूरा मामला?

पन्ना और छतरपुर ज़िलों के कई गांवों के लोग जिनमें ज़्यादातर आदिवासी थे, करीब दो हफ़्ते से कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे केंद्र सरकार के 44 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट और राज्य की कई सिंचाई परियोजनाओं के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे.

इस सांकेतिक विरोध के दौरान, कई प्रदर्शनकारियों ने अपने गले में फंदे बांधे और नदी में बनाई गई अस्थायी चिताओं पर लेट गए.

‘न्याय दो वरना मार दो’ के नारे के साथ यह अनोखा प्रदर्शन पहली बार अप्रैल में किया गया था. सरकार की बातचीत और कोशिशों के बाद भी जब ग्रामीण सहमत नहीं हुए, तो इस महीने की शुरुआत में इसे फिर से शुरू किया गया.

उनकी मांगों में बेहतर पुनर्वास और मुआवज़ा पैकेज शामिल हैं, साथ ही विस्थापन सर्वे में कथित तौर पर छूट गए लोगों को इसमें शामिल करना भी उनकी मांग है.

दरअसल,केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट भारत का पहला रीवर लिंक प्रोजेक्ट है. इसके तहत दौधन बांध और नहरों के नेटवर्क के जरिये केन नदी का पानी बेतवा बेसिन में पहुंचाया जाएगा. इसका मकसद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सिंचाई, पीने का पानी और पनबिजली उपलब्ध कराना है.

लेकिन इस प्रोजेक्ट के कारण जलाशय में डूबने वाले इलाकों के करीब 2000 परिवारों को विस्थापित होना पड़ेगा, जिसके चलते काफी समय से विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.

(Photo credit: PTI)

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