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राहुल गांधी के कहने पर महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी हॉस्टल में दाखिले के लिए उम्र की सीमा खत्म की

महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार (25 अगस्त, 2026) को आदिवासी छात्रों के हॉस्टल में एडमिशन के लिए उम्र सीमा का नियम खत्म करने का फैसला किया.

यह फैसला विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के सामने यह मुद्दा उठाए जाने के एक दिन बाद लिया गया.

मुंबई में महाराष्ट्र के आदिवासी विधायकों और सांसदों के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद फडणवीस ने कहा, “आदिवासी छात्रों के हॉस्टल में एडमिशन के लिए उम्र सीमा 30 साल थी. इस नियम को हटा दिया गया है. अब महाराष्ट्र में आदिवासी हॉस्टल में एडमिशन के लिए छात्रों पर उम्र का कोई नियम लागू नहीं होगा.”

राज्य का आदिवासी विकास विभाग पूरे महाराष्ट्र में 490 सरकारी हॉस्टल चलाता है, जहां हर साल 58 हज़ार से 60 हज़ार छात्र अपनी पढ़ाई के लिए रहते हैं. हॉस्टल में एडमिशन की प्रक्रिया के संबंध में सरकार ने 14 अगस्त को एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया था जिसमें उम्र सीमा 30 साल तय की गई थी.

दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कई मुद्दों को उठाया, जिसमें छात्रावास में प्रवेश के लिए उम्र की बाधा भी शामिल है, जिसे महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों द्वारा उठाया गया है जो पिछले 10 से ज्यादा दिनों से भूख हड़ताल पर हैं.

राहुल गांधी ने कहा, “पुणे में मुझे ऐसे नियमों के बारे में बताया गया जो उनसे उनकी गरिमा छीनते हैं और शिक्षा का रास्ता बंद कर देते हैं.”

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मंजरी स्थित आदिवासी विकास विभाग के हॉस्टल की एक छात्र ने प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रों की चिंताएं उनके सामने रखीं.

इसके दो दिन बाद, लोकसभा में विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर छात्रों से मिलने और उनकी शिकायतों का समाधान करने का आग्रह किया है.

छात्र पिछले 12 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांगों में हॉस्टल में दाखिले/रहने के लिए उम्र की सीमा हटाना और एक महीने से ज़्यादा की छुट्टियों के बाद लौटने वाली छात्राओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट अनिवार्य करने वाले नियम को वापस लेना शामिल है.

प्रदर्शनकारी छात्रा निशा साबले ने शनिवार को राहुल के साथ मंच साझा किया और उन्हें अपनी मांगों के बारे में बताया. उनकी बातें सुनने के बाद राहुल ने उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की पेशकश की थी.

सोमवार को फडणवीस को लिखे पत्र में राहुल ने कहा कि छात्र “दान नहीं मांग रहे हैं” बल्कि अपना हक मांग रहे हैं.

उन्होंने कहा, “अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्हें अपनी सेहत को खतरे में नहीं डालना चाहिए.”

उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी चिंताओं का समाधान करने का आग्रह किया.

राहुल ने कहा कि राज्य भर में आदिवासी छात्र दस दिनों से ज़्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “कई आदिवासी छात्र दूर-दराज़ के गांवों से आते हैं और शहरों में पढ़ाई करने के लिए सरकारी हॉस्टलों पर निर्भर रहते हैं. एक नया नियम 30 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को इन हॉस्टलों में रहने से रोकता है, जिससे कई ऐसे छात्र बाहर हो जाते हैं जो अभी भी अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं या परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि इन छात्रों के लिए हॉस्टल सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि वहां खाने, साफ़-सफ़ाई और मेडिकल सुविधाओं की कमी है. सांप के काटने की घटनाएं भी सामने आई हैं.

कांग्रेस सांसद ने कहा, “हॉस्टल सुरक्षित नहीं हैं और अक्सर वहां खाने-पीने, साफ़-सफ़ाई और मेडिकल सुविधाओं की कमी होती है. छात्रों को चोटें आई हैं और उनकी मौत भी हुई है, जिसमें सांप के काटने से हुई मौतें भी शामिल हैं. महिलाओं के लिए तो सुविधाएं और भी खराब हैं.”

महिला छात्रों के “प्रेग्नेंसी टेस्ट” पर हैरानी जताते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि लंबे समय बाद लौटने वाली छात्राओं को अपनी ‘फिटनेस’ साबित करने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट और कई अन्य मेडिकल टेस्ट से गुज़रना पड़ता है. यह अपमानजनक है और इसमें उन्हें तब तक दोषी माना जाता है जब तक वे खुद को बेगुनाह साबित न कर दें. यह नियम उनकी गरिमा और इंसानियत पर हमला है.”

राज्य भर के आदिवासी छात्रों ने 4 अगस्त को सरकार द्वारा एक सरकारी आदेश (GR) जारी किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें हॉस्टल में रहने की उम्र सीमा 26 साल तय की गई थी.

हालांकि, इस फ़ैसले के बाद विरोध शुरू होने पर 14 अगस्त को GR में बदलाव किया गया और उम्र सीमा बढ़ाकर 30 साल कर दी गई. लेकिन छात्र इस GR को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे थे.

साथ ही वे राज्य भर में आदिवासी विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे हॉस्टलों में बेहतर सुविधाओं की भी मांग कर रहे हैं. वे आदिवासी समुदाय के उम्मीदवारों की 12,500 खाली पदों पर तुरंत भर्ती की भी मांग कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका कहना है कि ये भर्तियां लंबे समय से अटकी हुई हैं.

आदिवासी हॉस्टलों के सेफ्टी ऑडिट की मांग

वहीं सोमवार को ही कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में कुपोषण की वजह से आदिवासी बच्चों की कथित मौतों और महाराष्ट्र में सांप के काटने से आदिवासी लड़कियों की मौतों की जांच के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाने और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख विक्रांत भूरिया ने दोनों राज्यों में सुविधाओं में कथित कमियों का हवाला देते हुए आदिवासी हॉस्टलों के सेफ्टी ऑडिट की भी मांग की.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विक्रांत भूरिया ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी समुदाय के 22 बच्चों की मौत कुपोषण और उससे जुड़ी बीमारियों से हुई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि घरों तक पहुंचाया जाने वाला पौष्टिक भोजन छह महीने से बंद कर दिया गया था और सबसे पास का प्राइमरी हेल्थ सेंटर 20 किलोमीटर दूर था. उन्होंने दावा किया कि इलाके में वैक्सीनेशन कवरेज भी 80 प्रतिशत से कम था.

उन्होंने कहा, “मैंने मध्य प्रदेश विधानसभा में पूछा था कि 2020 से 2025 तक राज्य के आदिवासी ब्लॉक और प्रोजेक्ट्स में कुपोषण को रोकने के लिए कितना बजट आवंटित किया गया था और उसमें से कितना खर्च किया गया. जवाब बहुत चिंताजनक था. सरकार ने कहा कि कुपोषित बच्चों को हर दिन सिर्फ़ 12 रुपये कीमत का पौष्टिक भोजन दिया जाता है.”

महाराष्ट्र की बात करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि गढ़चिरौली के एक आदिवासी हॉस्टल में 70 से ज़्यादा लड़कियों को एक ही कमरे में ज़मीन पर सुलाया जाता था.

उन्होंने दावा किया कि सांप के काटने की घटना के बाद छह लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से तीन की मौत हो गई.

विक्रांत भूरिया ने कहा कि नासिक में प्रदर्शन कर रहे छात्र आदिवासी हॉस्टलों में बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं. उन्होंने बालाघाट में हुई मौतों की जांच और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

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