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अनकापल्ली के आदिवासियों ने अपने गांवों तक सड़क के लिए घोड़ों पर रैली निकाली

आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली ज़िले के तीन दूरदराज के गांवों के आदिवासियों ने शुक्रवार को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की मांग को लेकर 3 किलोमीटर तक घोड़ों पर सवार होकर रैली निकाली.

प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर थे और वो अपने गांवों तक पसुवुलबंदा से बंदरू रोड तक, सड़कें बनाने की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे.

दरअसल, मोटर वाली सड़कें न होने के कारण गांव वालों को मरीज़ों को डोली (कपड़े का बना अस्थायी स्ट्रेतर) में ले जाना पड़ता है और ज़रूरी सामान घोड़ों पर ढोना पड़ता है.

विरोध प्रदर्शन में CPI-M के जिला नेता के. गोविंदा राव, और मडुगुला निर्वाचन क्षेत्र के PVTG नेता सिदिरी कामेश्वर राव, कोरा महेश, सिदिरी राजबाबू और कोरा बलाराजू शामिल थे.

विरोध करने वालों ने कहा, “पशुवुला बंदा, जीलुगुलोवा और सोम्पुरा बंदा में सड़कों की कमी के कारण लोगों को बहुत ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मेडिकल इमरजेंसी, जैसे बीमारी या प्रेग्नेंसी के समय लोगों को नज़दीकी सड़क या हेल्थकेयर सेंटर तक पहुंचने के लिए 3 किलोमीटर से ज़्यादा पहाड़ी रास्ते पर कपड़े की बनी स्ट्रेचर पर मरीज़ों को ले जाना पड़ता है. स्थानीय निवासी सीडिरी वेंकटराव और कोरा बाबूराव की जान चली गई क्योंकि उन्हें समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल पाई.”

उन्होंने कहा कि सड़क बनाने की मांग को लेकर अनकापल्ली ज़िले के कलेक्टर को कई बार ज्ञापन दिए गए हैं.

अनकापल्ली कलेक्टर से गुहार लगाने के बाद पंचायत राज विभाग ने जीलुगुलोवा से पसुवुलबंदा तक मेटल रोड बनाने के लिए 2.1 करोड़ की अनुमानित लागत का एस्टीमेट तैयार किया.  लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है क्योंकि सड़क को अभी तक मंज़ूरी नहीं मिली है.

जिससे गांव वाले बैलगाड़ियों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं. राशन का सामान, पेंशन और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों को लाना-ले जाना बहुत मुश्किल है.

इसके बाद गांव वालों ने उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से सड़क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने, बकाया बिलों का भुगतान करने और निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अपील की.

2 दिसंबर, 2024 को ‘पल्ले पंडुगा’ कार्यक्रम के पहले चरण के दौरान, अरला और पित्रीगड्डा, वाईबी पटनम और पेडा गरवु वाया लंबसिंगी, और ज़ेड. जोगुमपेटा से नेरेडुबंदा के बीच सड़क कार्यों का उद्घाटन चोडावरम विधायक केएसएन राजू ने किया था.

सड़कें बनाई गईं लेकिन वे बारिश में बह गईं और अधूरे सड़कों पर गड्ढे बन गए. ठेकेदारों ने बीच में ही काम रोक दिया था क्योंकि उनके बिलों का पेमेंट नहीं हुआ था.

ऐसे में आदिवासी लोगों ने बिलों का पेमेंट करने और अधूरे सड़क कामों को पूरा करने की मांग की.

क्या है पूरा मामला?

रविकामथम मंडल की चीमलपाडु पंचायत के जीलुगुलोवा, सोमपुरंबंडा और सोमुलम्माकोंडा में 21 PVTG परिवारों के करीब 120 लोग रहते हैं.

हाल ही में सिदिरी वेंकट राव और कोरा बाबू राव की खराब स्वास्थ्य के कारण मौत हो गई थी. क्योंकि सड़क कनेक्टिविटी की कमी के कारण उन्हें समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल पाई थी.

गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को पहाड़ी पर ऊपर-नीचे 3 किमी तक डोलियों में सड़क तक ले जाना पड़ता है और वहां से कोठाकोटा PHC तक।

आदिवासी लोगों ने कहा कि गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद गांवों में बिजली तो दी गई, लेकिन सड़क कनेक्टिविटी अभी भी नहीं मिली है जिससे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

(Photo credit: The Hindu)

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