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इन 4 राज्यों में PVTGs गांवों के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी अभियान शुरू

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने चार राज्यों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के बीच औपचारिक बैंकिंग सेवाओं और और रियायती क्रेडिट (आसान शर्तों पर लोन) तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए एक फाइनेंशियल लिटरेसी पहल शुरू की है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी.

इस पहल का नाम पीवीटीजी वित्त समृद्ध ग्राम (PVTG V-SamGra) रखा गया है. इसे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) के सहयोग से शुरू किया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम की शुरुआत 27 सितंबर को मध्य प्रदेश में की गई थी.

इसके पहले चरण में मार्च 2027 तक मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लगभग 200 चयनित पीवीटीजी गांवों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रत्येक राज्य के लगभग 50 गांवों को इसमें शामिल किया जाएगा.

जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य वित्तीय जागरूकता की उन कमियों को दूर करना है, जिनके कारण दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय परिवार बैंक और अन्य वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद संस्थागत क्रेडिट (बैंकों से लोन) प्राप्त नहीं कर पाते हैं.

उन्होंने कहा, “यह पहल लाभार्थियों को रियायती लोन योजनाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं, पात्रता की शर्तों और ज़रूरी दस्तावेज़ों के बारे में जानकारी देगी. साथ ही लोन के लिए आवेदन करने में मदद भी करेगी. अब तक मध्य प्रदेश के सीधी और सिंगरौली ज़िलों और ओडिशा के मलकानगिरी ज़िले में सात फाइनेंशियल लिटरेसी कैंप आयोजित किए जा चुके हैं. जबकि अगले हफ़्ते के लिए मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले में आठ और ओडिशा के गजपति ज़िले में तीन कैंप की योजना बनाई गई है.”

उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के तहत, NSTFDC पात्र परिवारों तक पहुंचने के लिए अपने ज़ोनल ऑफ़िस, राज्य की नोडल एजेंसियों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और अन्य स्थानीय हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

उन्होंने कहा, “फ़ील्ड टीमें परिवारों से मिलकर उनकी आजीविका योजनाओं को समझ रही हैं और उन्हें यह समझा रही हैं कि कैसे रियायती लोन और क्रेडिट की अन्य सुविधाएं खेती, पशुपालन और छोटे व बहुत छोटे (माइक्रो और नैनो) उद्यम शुरू करने में मदद कर सकती हैं. इस कार्यक्रम का मकसद संभावित लाभार्थियों को आवेदन प्रक्रिया को समझने और लोन लेने के बारे में सही फ़ैसले लेने में मदद करना भी है.”

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान से जुड़ी पहल

यह पहल PVTG समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए 15 नवंबर, 2023 को शुरू किए गए ‘प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान’ (PM-JANMAN) के तहत लागू की जा रही है.

इस मिशन के तहत केंद्र सरकार के नौ मंत्रालयों के प्रयासों को 11 प्रमुख क्षेत्रों में एकीकृत किया गया है. इनमें आवास, पीने का पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सड़क संपर्क, बिजली और टिकाऊ आजीविका जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

सरकार ने देश के 18 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में कुल 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की पहचान की है. इनमें से अनेक समुदाय भौगोलिक रूप से अलग-थलग बस्तियों में रहते हैं, उन्हें जरूरी सेवाओं और आर्थिक अवसरों तक पहुंचने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

अधिकारी पहले चरण को एक डिलीवरी सिस्टम और सीखने की प्रक्रिया के तौर पर देख रहे हैं, ताकि वित्तीय जागरूकता, बैंकिंग तक पहुंच, दस्तावेज़ीकरण और आजीविका गतिविधियों की उपयुक्तता में कमियों की पहचान की जा सके.

इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या गाँव-स्तर के कैंप औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बना सकते हैं.

पहले चरण के मूल्यांकन के बाद, मंत्रालय दूसरे चरण में कार्यक्रम का विस्तार करने पर विचार करेगा, जिसमें वित्तीय समावेशन से जुड़े और भी कई उपाय शामिल किए जाएंगे.

चोपड़ा ने कहा, “इसका बड़ा मकसद सिर्फ़ बैंक खाता खुलवाने से आगे बढ़कर, कमज़ोर आदिवासी परिवारों को ऐसी जानकारी और मदद देना है, जिससे वे टिकाऊ आजीविका के लिए संस्थागत वित्त (institutional finance) का लाभ उठा सकें.”

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