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छत्तीसगढ़: आदिवासियों के टिन व्यापार को सीधे लंदन मेटल एक्सचेंज से जोड़ा गया

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने स्थानीय खनिकों को सशक्त बनाने और बिचौलियों को हटाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासी प्रोत्साहन (Tribal Incentives on Natural Resources) पोर्टल लॉन्च किया.

यह पोर्टल बस्तर के टिन इकट्ठा करने वाले आदिवासियों की कमाई को सीधे ग्लोबल मार्केट की कीमतों से जोड़ता है.

इस नई पहल के तहत, बस्तर में टिन अयस्क की खरीद की कीमत सीधे लंदन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange) से जोड़ी जाएगी.

यह प्लेटफॉर्म यह पक्का करता है कि स्थानीय परिवारों को उनके प्राकृतिक संसाधनों का सही आर्थिक मूल्य मिले. इसके लिए स्थानीय भुगतान को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जोड़ा गया है और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए पेमेंट सीधे इकट्ठा करने वालों के बैंक खातों में भेजा जाता है.

इस प्लेटफॉर्म को एक अहम “मिनरल-टू-लाइवलीहुड” (खनिज से आजीविका) पहल बताते हुए, साय ने कहा कि यह पोर्टल खनिज संपदा को टिकाऊ और ज़मीनी स्तर की समृद्धि में बदलता है.

उनका कहना था कि इसका उद्देश्य बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सीधे जनजातीय परिवारों की आय और आजीविका से जोड़ना है.

इस एंड-टू-एंड डिजिटल इकोसिस्टम में इकट्ठा करने वाले आदिवासियों का आसानी से रजिस्ट्रेशन और रियल-टाइम LME दरों से जुड़ी वैज्ञानिक गुणवत्ता जांच शामिल है.

इसमें इंटीग्रेटेड QR कोड, SMS अपडेट और बैंकिंग गेटवे के ज़रिए रियल-टाइम ट्रैकिंग और वेरिफिकेशन की सुविधा होगी, जिससे इकट्ठा करने वाले वज़न, कीमत और पेमेंट प्रोसेस को खुद ट्रैक कर सकेंगे.

लाभार्थियों के खातों में तुरंत फाइनेंशियल सेटलमेंट होगा, जिससे कमीशन की कटौती, देरी और शोषण करने वाले बिचौलियों से छुटकारा मिलेगा.

छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC), जो अभी बस्तर डिवीज़न में छह खरीद केंद्र चलाता है, ने रजिस्टर्ड इकट्ठा करने वालों के लिए फाइनेंशियल सर्विस और सीधे क्रेडिट एक्सेस को बेहतर बनाने के लिए इंडियन ओवरसीज़ बैंक के साथ एक MoU साइन किया है.

टिन के व्यापार को औपचारिक रूप देने से पूरे इलाके में आर्थिक तेज़ी आई है। 2024–25 फाइनेंशियल ईयर के दौरान, CMDC ने 8,707 किलोग्राम टिन अयस्क खरीदा और सीधे पेमेंट के तौर पर 90.8 लाख रुपये बांटे.

साल 2025–26 तक, खरीद बढ़कर 20,895 किलोग्राम से ज़्यादा हो गई और आदिवासी परिवारों को सीधे 3.8 करोड़ रुपये मिले.

दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए, CMDC बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में तीन और कलेक्शन सेंटर बना रहा है.

बढ़े हुए फिजिकल नेटवर्क और TIN पोर्टल की डिजिटल निगरानी से सबसे दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदाय अपने उत्पाद को स्थानीय स्तर पर सर्टिफाइड ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से बेच सकते हैं.

सरकार का कहना है कि इससे वित्तीय सहयोग बढ़ेगा और लाभार्थियों को बैंकिंग सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी.

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