सरकार के ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (DAJGUA) प्रोग्राम के तहत आदिवासी बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं के लिए काम शुरू हुए करीब दो साल हो चुके हैं लेकिन प्रगति धीमी रही है. खासकर हॉस्टल, सड़क संपर्क और LPG कनेक्शन के मामले में.
केंद्र की समीक्षा से पता चलता है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय जैसे मंत्रालयों के तहत आने वाले कामों में अब तक सबसे कम प्रगति हुई है.
DAJGUA योजना अक्टूबर 2024 से चल रही है और इसका मकसद 17 मंत्रालयों के तहत दूर-दराज के आदिवासी गांवों और ब्लॉकों में 25 तरह की सुविधाएं पहुंचाना था.
692 हॉस्टल में से केवल 4 पूरे
प्रोग्राम शुरू होने के बाद से देश भर में अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए मंजूर किए गए 692 छात्रावास यानि हॉस्टल में से केवल 4 ही पूरे हो पाए हैं, जबकि शिक्षा मंत्रालय ने इस काम के लिए मंजूर फंड का लगभग 27 फीसदी जारी किया है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 300 हॉस्टलों की आधारशिला रखी गई है.
शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए छात्रावासों का निर्माण और विस्तार अहम माना गया है. क्योंकि कई आदिवासी गांव स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों से दूर हैं, ऐसे में छात्रावास बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद कर सकते हैं.
लेकिन इसके निर्माण में देरी से दूरदराज़ क्षेत्रों के छात्रों, विशेषकर माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों, पर असर पड़ सकता है.
LPG कनेक्शन में भी देरी
इसके अलावा, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संसद में पेश आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक लक्षित अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थियों में से लगभग 5 फीसदी को LPG कनेक्शन मिले हैं, और 1,700 से ज़्यादा दूर-दराज के आदिवासी गांवों को जोड़ने के लिए मंजूर की गई एक भी सड़क या पुल का काम पूरा नहीं हुआ है.
जनजातीय परिवारों तक स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था. एलपीजी का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन, जैसे – लकड़ी और अन्य ठोस ईंधनो पर निर्भरता कम करना और महिलाओं के स्वास्थ्य और समय की बचत करना है. इसके बावजूद, कई क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रगति अपेक्षा से कम रही.
सड़क संपर्क
जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण और गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ना विकास का महत्वपूर्ण आधार है. सड़कें बनने से स्कूल, अस्पताल, बाजार, सरकारी सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होती है. लेकिन योजना के अंतर्गत सड़क संपर्क के लक्ष्य भी अपेक्षित गति से पूरे नहीं हुए हैं.
इसके अलावा ग्रामीण आवास योजना के तहत, सरकार ने 17.2 लाख से ज़्यादा घरों को मंजूरी दी थी, जिनमें से लगभग 7.8 लाख घर बनकर तैयार हो गए हैं.
घरों में ऑन-ग्रिड बिजली पहुंचाने की योजना के तहत, मंजूर किए गए 2.86 लाख घरों में से लगभग 34 फीसदी घरों में अब तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है.
साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत, सरकार ने 63 हज़ार से ज़्यादा आदिवासी गांवों में से 47 फीसदी गांवों में नल से पानी की सुविधा पहुंचा दी है.
ये आंकड़े राज्यसभा में DAJGUA प्रोग्राम की प्रगति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में साझा किए गए.
जवाब में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि मंत्रालय ने ग्रामीण आवास, सड़क कनेक्टिविटी और अन्य योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान की है.
मंत्री ने इन देरी के लिए “प्रक्रियात्मक मुद्दों, ज़मीन से जुड़ी दिक्कतों, कानूनी मंज़ूरी और काम करने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल की चुनौतियों” को ज़िम्मेदार ठहराया.

