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महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी हॉस्टल में रहने वाले आदिवासी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन करने पर लगाई थी रोक, अब वापस लिया निर्देश

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी आदिवासी छात्रावासों (Hostels) के छात्रों के लिए एक नया शासनादेश (GR) जारी कर उनके विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था.

लेकिन पूरे महाराष्ट्र में अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए, राज्य सरकार और आदिवासी विकास विभाग ने इस विवादित नियम को वापस ले लिया है.

दरअसल, इस नियम के तहत सरकारी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के भूख हड़ताल, विरोध मार्च, ऐसी ही दूसरी गतिविधियों में शामिल होने, अपनी शिकायतों के लिए मीडिया से संपर्क करने या प्रशासन के खिलाफ दूसरे छात्रों को एकजुट करने से रोका गया था.

लेकिन सरकार ने शुक्रवार को एक संशोधित सरकारी आदेश (GR) जारी किया, जिसके तहत ST छात्रों के लिए सरकारी हॉस्टल में एडमिशन की अधिकतम उम्र सीमा 26 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दी गई है.

ये पाबंदियां 5 अगस्त को जारी GR (सरकारी आदेश) के तहत नियमों के ‘अपेंडिक्स D क्लॉज़ 22’ में शामिल थीं. इस क्लॉज़ के तहत छात्रों को हॉस्टल से जुड़ी शिकायतें पहले लिखित रूप में वार्डन या हॉस्टल प्रमुख को देनी होती थीं और उन्हें संगठनों, भूख हड़ताल या विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने, शिकायतों को लेकर मीडिया से संपर्क करने, प्रशासन के खिलाफ समूह बनाने या हड़ताल को बढ़ावा देने से रोका गया था.

हालांकि, 14 अगस्त को जारी संशोधित GR में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इसमें हॉस्टल में रहने वालों के लिए नियम ‘क्लॉज़ 12’ पर ही खत्म हो जाते हैं, जिससे पुरानी पाबंदियां असल में हट गई हैं.

यह बदलाव 5 अगस्त के GR के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध के बाद किया गया.

क्या है पूरा मामला?

5 अगस्त के सरकारी आदेश में पहली बार हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के भूख हड़ताल, विरोध मार्च और ऐसी ही दूसरी गतिविधियों में शामिल होने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई थी.

साथ ही इसमें आदिवासी हॉस्टल में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 26 साल तय की गई थी. जबकि पहले के नियमों में उम्र की कोई सीमा नहीं थी.

इन नियमों की वजह से पूरे राज्य में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए.

‘आदिवासी विद्यार्थी संघ विदर्भ, नागपुर’ के अनुसार, गुरुवार से नागपुर में ‘अतिरिक्त आयुक्त, आदिवासी विकास’ के कार्यालय के बाहर 1 हज़ार से ज़्यादा एसटी छात्रों ने धरना दिया, जबकि दूसरी जगहों पर भी ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन हुए.

हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक विरोध करने वाले छात्रों की संख्या 500 से कम थी.

ट्राइबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि हॉस्टल में पढ़ाई-लिखाई का माहौल बनाए रखने और छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखने के मकसद से पहली बार विरोध-प्रदर्शनों पर साफ़ तौर पर रोक लगाई गई थी.

हालांकि, छात्रों का कहना था कि इन नियमों से उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार को खतरा है.

वहीं गोंदिया के देओरी की छात्रा मैना सलामे ने कहा कि छात्राओं को अक्सर वॉर्डन के ज़रिए अपनी शिकायतें सुलझाने में मुश्किल होती है और उन्हें मदद के लिए छात्र संगठनों के पास जाना पड़ता है. उन्होंने कहा, “ऐसे मामलों में विरोध-प्रदर्शन करना ज़रूरी हो जाता है.”

सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत के बाद संशोधित सरकारी आदेश (GR) जारी किया गया.

गुरुवार को ट्राइबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी विजय वाघमारे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए छात्रों से बात की.

जबकि ट्राइबल डेवलपमेंट मिनिस्टर अशोक उइके ने शुक्रवार को उनके साथ एक घंटे की बैठक की.

सरकार ने अब एसटी हॉस्टल में एडमिशन के लिए अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाकर 30 साल कर दी है.

पहले की 26 साल की सीमा के बारे में बताते हुए डिपार्टमेंट ने कहा कि यह इस सोच पर आधारित थी कि एसटी छात्र आम तौर पर उस उम्र तक अपनी डिग्री, डिप्लोमा या पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स पूरे कर लेते हैं.

डिपार्टमेंट ने यह भी बताया कि जो छात्र हॉस्टल में एडमिशन नहीं ले पाते, वे ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयं योजना’ का लाभ उठा सकते हैं, जिसमें उम्र सीमा 30 साल है.

संशोधित GR में कहा गया है, “छात्र प्रतिनिधियों द्वारा उम्र सीमा के बारे में बताई गई दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए, ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयं योजना’ की तर्ज पर हॉस्टल में एडमिशन के लिए अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाकर 30 साल की जा रही है.”

संशोधित GR के अनुसार, पूरे महाराष्ट्र में 494 सरकारी हॉस्टलों को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 490 अभी चल रहे हैं.

इसमें कहा गया है कि 5 अगस्त के GR में हॉस्टल की सुविधाओं और सहूलियतों से जुड़े पहले के कई आदेशों को एक साथ मिला दिया गया था.

हालांकि, इस बदलाव के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. वे मांग कर रहे हैं कि उम्र सीमा की पाबंदी पूरी तरह हटा दी जाए.

विरोध कर रहे एक छात्र ने कहा, “हम आंदोलन जारी रखेंगे और आगे की कार्रवाई के बारे में जल्द ही फ़ैसला करेंगे.”

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