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बंधुआ मज़दूरी से बचाए गए 41 आदिवासी मज़दूर

गुरुवार को एक जॉइंट इंटर-स्टेट ऑपरेशन में महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के 41 आदिवासी मज़दूरों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, उनको आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं ज़िले की पांच जगहों से बचाया गया. इन पर बंधुआ मज़दूरी और शोषण के आरोप थे.

बचाए गए मज़दूर विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) कातकरी आदिवासी समुदाय (Katkari tribal community) से हैं और आरोप है कि उनसे तीन साल से ज़्यादा समय से ज़बरदस्ती काम करवाया जा रहा था.

यह मामला तब सामने आया जब दो युवक वर्कसाइट्स यानि काम वाली जगह से भागकर महाराष्ट्र पहुंचे और स्थानीय समाज सेवकों की मदद से अपने परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ज़िला अधिकारियों ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) के तहत एक कोऑर्डिनेटेड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया.

कार्रवाई करते हुए श्री सत्य साईं ज़िले के अधिकारियों ने महाराष्ट्र के अधिकारियों के साथ मिलकर उन पांच जगहों की पहचान की जहां मज़दूरों को कथित तौर पर बंधुआ बनाकर रखा गया था.

ये जगहें चिंथलापल्ली, गोरंटला के पास पुलेरू रोड, थुम्मरायनी थंडा और तालमारला में थीं. इनमें से चार जगहें गोरंटला मंडल में और एक कोथाचेरुवु मंडल में थीं.

बचाए गए मज़दूरों की मेडिकल जांच की गई और पूछताछ के लिए उन्हें MRO ऑफिस ले जाया गया.

पूछताछ के दौरान, उन्होंने शारीरिक शोषण, लंबे समय तक काम करने और मज़दूरी न मिलने की शिकायत की.

मज़दूरों ने बताया कि 20,000 से 50,000 रुपये की शुरुआती एडवांस रकम लेने के बाद वे फंस गए थे. जिसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई, बिना पैसे के लंबे समय तक काम करवाया गया, उनकी आवाजाही पर रोक लगाई गई और उन्हें मेडिकल सुविधाएं नहीं दी गईं.

बचाए गए लोगों में नौ महीने की गर्भवती महिला भी शामिल थी.

बचाए गए लोगों के बयान दर्ज करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों में ले जाने से पहले मेडिकल टीमों ने उनकी जांच की.

पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है और वर्कसाइट के मालिकों का पता लगा रही है, जो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं.

ऑपरेशन के बाद रेस्क्यू एक्सपर्ट्स ने भविष्य में दूसरे राज्यों से लोगों को बचाने, उन्हें वापस भेजने और बचाए गए लोगों के पुनर्वास के लिए स्टैंडर्ड तरीके तय करने के मकसद से एक औपचारिक इंटर-स्टेट मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की मांग की.

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