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मणिपुर हिंसा के दौरान सामूहिक बलात्कार का शिकार बनीं महिला की मौत, कुकी समूहों ने की न्याय की मांग

मणिपुर की कुकी जनजाति से संबंधित एक युवा महिला, जिनका मई 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा के चरम के दौरान अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया गया था, उसकी 10 जनवरी को लंबी बीमारी के कारण मौत हो गई है.

महिला की बीमारी हिंसा के दौरान लगी चोटों के कारण और गंभीर हो गई थी. घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष थी.

वहीं अब कई कुकी संगठनों ने कुकी महिला के लिए न्याय की मांग की है.

मणिपुर के चुराचांदपुर और दिल्ली में स्थित कुकी संगठनों ने दावा किया कि महिला को मई 2023 में इंफाल में किडनैप किया गया और गैंगरेप किया गया.

संगठनों का कहना है कि वह अपने हमलावरों से बच तो गई थी लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से कभी उबर नहीं सकी.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मौत के समय उनका इलाज गुवाहाटी में चल रहा था.

एक बयान में कुकी समूह इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने कहा, “उनकी मौत इस बात का एक और दर्दनाक सबूत है कि कुकी-ज़ो लोगों को कितने बेरहमी से निशाना बनाया गया है.”

ITLF ने कहा कि अब कुकी-ज़ो लोगों के पास “हमारी सुरक्षा, सम्मान और अस्तित्व” के लिए एक अलग प्रशासन की मांग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

ITLF ने शनिवार शाम को चुराचांदपुर में उनके सम्मान में एक कैंडललाइट जुलूस निकाला.

कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (KSO), दिल्ली और NCR ने आरोप लगाया कि अपराध की गंभीरता और नागरिक समाज संगठनों की बार-बार अपील के बावजूद, अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

KSO दिल्ली और NCR ने कहा, “हम साफ तौर पर कहते हैं कि उनकी मौत को 2023 में उनके खिलाफ हुई हिंसा का नतीजा माना जाना चाहिए. इसे किसी और तरह से मानने की कोई भी कोशिश न्याय से इनकार और ज़िम्मेदारी से बचने जैसा होगा.”

कुकी जनजाति के एक महिला समूह ने कहा कि पीड़िता को न सिर्फ उसके साथ हुए अन्याय के लिए बल्कि अकल्पनीय क्रूरता का सामना करने में उसकी हिम्मत और साहस के लिए भी याद किया जाएगा.

कुकी-ज़ो महिला फोरम, दिल्ली और NCR ने एक बयान में कहा, “करीब तीन साल तक उसने ऐसा दर्द सहा जो किसी भी इंसान को कभी नहीं सहना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा कि महिला को गर्भाशय से जुड़ी दिक्कतें हो गई थीं और वह बार-बार अस्पताल आती-जाती रहती थीं.उन्होंने ढाई साल से ज़्यादा समय तक तकलीफ़ झेली.”

CPI(M) नेता वृंदा करात ने कहा कि मृतक मणिपुर में BJP-RSS की बांटने वाली राजनीति का शिकार थी.

इन समूहों ने कुकी लोगों के लिए अलग प्रशासन की भी मांग की, यह दावा करते हुए कि उनके लिए मैतेई समुदाय के साथ रहना संभव नहीं है.

संगठन ने केंद्र सरकार से आदिवासियों के लिए एक अलग प्रशासन बनाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने की अपील की, जो “ज़रूरी और टाला नहीं जा सकता.”

मई 2023 से मणिपुर में इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ियों के कुकी-ज़ो समूहों के बीच जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है.

क्या है मामला?

यह मामला शुरू में कांगपोकपी पुलिस स्टेशन में ज़ीरो FIR के तौर पर दर्ज किया गया था. लेकिन बाद में राज्य में हिंसा के दौरान हुए दूसरे यौन उत्पीड़न के मामलों के साथ इसे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दिया गया.

CBI ने अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं की है या चार्जशीट दायर नहीं की है.

महिला ने 21 मई, 2023 को कांगपोकपी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी. बाद में, मामला इंफाल के पोरोमपत पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया क्योंकि घटना वाली जगह उसी के अधिकार क्षेत्र में आती थी.

FIR में कहा गया है कि उस समय 18 साल की लड़की को इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में एक ATM बूथ से अगवा किया गया था. FIR में आगे कहा गया है कि चार हथियारबंद लोग मौके पर आए, उसे एक कार में धकेला और एक पहाड़ी पर ले गए, जहां उनमें से तीन ने बारी-बारी से उस युवती का रेप किया.

FIR में आगे कहा गया है कि जब वे चारों इस बात पर बहस कर रहे थे कि उसे मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए, तो उनमें से एक ने कार मोड़ने की कोशिश की, लेकिन गलती से कार उसे लग गई और वह “नीचे गिर गई.”

गिरने के बाद महिला चमत्कारिक रूप से बच गई और एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की मदद से इंफाल के न्यू लंबुलेन इलाके में अपने घर पहुंची.

अगले दिन उसका परिवार इंफाल से कांगपोकपी चला गया. उसे इलाज के लिए कांगपोकपी जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत “गंभीर” होने के कारण उसे नागालैंड की राजधानी कोहिमा के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया.

(Photo credit: PTI)

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