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केंदू पत्ते पर TCS घटाकर 2% करने से ओडिशा के लाखों आदिवासियों को होगा फायदा

आदिवासी समुदायों के लाखों लोगों को राहत देते हुए 2026 के केंद्रीय बजट में केंदू पत्तों (Kendu leaves) पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानि TCS को मौजूदा 5 से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है.

केंदू पत्तों का कलेक्शन ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के लिए आय का मुख्य स्रोत है.

केंदू पत्तों ने पहले राजनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, खासकर ओडिशा के पश्चिमी जिलों में.

सूत्रों ने बताया कि हालांकि अब इसका राजनीतिक महत्व कम हो गया है लेकिन इस क्षेत्र में आदिवासी समुदायों की अर्थव्यवस्था पर इसका अभी भी बहुत बड़ा प्रभाव है.

दो प्रतिशत TCS का प्रस्ताव इन कलेक्टरों की नेट इनकम को सीधे बढ़ाने की संभावना है. इसके अलावा टैक्स का बोझ कम होने से व्यापारियों और सरकारी खरीद एजेंसियों को प्राइमरी इकट्ठा करने वालों को बेहतर कीमतें देने में भी मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि कम टैक्स दर से पत्तों की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगी, साथ ही बिक्री की कुल मात्रा भी बढ़ेगी, खासकर सरकारी खरीद एजेंसियों के माध्यम से.

सूत्रों ने आगे कहा, “पहले ऊंची GST दर के कारण पत्ते गोदामों में जमा हो जाते थे. अब कम दर से इस स्टॉक को तेजी से निकालने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, यह फैसला बीड़ी बनाने वालों की भी मदद करेगा. क्योंकि केंदू पत्ते का इस्तेमाल बीड़ी बनाने में किया जाता है इसलिए कच्चे माल पर कम टैक्स से ग्रामीण बीड़ी बनाने वाले उद्योग को भी आर्थिक रूप से मदद मिलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं.”

हालांकि, BJD केंदू पत्ते पर GST पूरी तरह से माफ करने की मांग कर रही है.

BJD के एक नेता ने मीडिया को बताया कि यह फैसला कलेक्टरों के लिए ज्यादा मददगार नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जब केंदू पत्ते पर GST 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया था, तब BJD ने पूरी तरह से माफी की मांग की थी. उन्होंने कहा कि पार्टी अभी भी अपनी बात पर कायम है.

केंदू पत्ते वन राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत

तेंदू या डायोस्पाइरोस मेलनॉक्सिलोन के नाम से भी जाने जाने वाले केंदू पत्ते पतले और लचीले होते हैं. ये पत्ते सूखने के बाद टूटते नहीं. इनका उपयोग मुख्य रूप से बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है.

इसके अलावा केंदू पत्ते डायबिटीज, बुखार और दस्त जैसी बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक पद्धतियों में इस्तेमाल किए जाते हैं. ये पत्ते एक महत्वपूर्ण नॉन-वुड फॉरेस्ट प्रोडक्ट (NWFP) हैं, जो कई आदिवासी समुदायों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं.

केंदू पत्ता सरकार और स्थानीय समुदायों दोनों के लिए गैर-इमारती वन राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा केंदू पत्तों का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. केंदू पत्तों का वार्षिक उत्पादन लगभग 3 लाख क्विंटल है, जो राष्ट्रीय वार्षिक उत्पादन का लगभग 20 फीसदी है.

इसे ओडिशा में आमतौर पर “हरा सोना” के रूप में जाना जाता है.

केंदू पत्ता ओडिशा के 22 जिलों में पाया जाता है और केंदू पत्ते के व्यापार पर निर्भर अधिकांश लोग आदिवासी हैं.

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