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राज्य सरकार के दिए भूमि आधिकार का क्यों कर रहे है आदिवासी विरोध

असम में कार्बी एंगलोंग ऑटोनोमस काउंसिल (Karbi Anglong Autonomous council) ने 19 और 20 फरवरी को मीटिंग की घोषणा की है.

कार्बी काउंसिल द्वारा प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व लेंड (Professional grazing reserve land) और विलेज ग्रेजिंग रिजर्व (Village grazing reserve) के तहत मिलने वाले भूमि अधिकार को नियंत्रित किया जाता है.

पिछले कुछ दिनों से इन्ही दो रिजर्व को लेकर राज्य में अशांति फैली हुई है.

गुरूवार से ही राज्य के कार्बी आंगलोंग ज़िले (Karbi Anglong District)में कार्बी स्टूडेंट एसोसिएशन (karbi student Association)द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों की ये मांग है की राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले पीजीआर और वीजीआर (ज़मीन आधिकार) बाहरी लोगों को न मिले.

विरोध प्रदर्शन के चलते राज्य के दीफू, मांजा, डोकमोका, बोकाजन और अन्य स्थानों पर दुकानें बंद रही और सड़कों पर बेहद कम वाहन देखने को मिले.

क्यों हो रहा है विरोध

द ऑटोनोमस स्टेट डिमांड कमेटी यूथ फ्रंट (The Autonomous State demand committee youth front) और कार्बी स्टूडेंट एसोसिएशन, रंचनातमक नोनिया संयुक्त संघ (Rachnatamak Nonia Sanyukta Sangh) के कार्यों का विरोध कर रहे हैं.

यह भी कहा जा रहा है की आरएनएसएस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौपा था. जिसमें यह आग्रह किया गया की कार्बी आंगलोंग में रहने वाले सभी लोगों को पीजीआर और वीजीआर के तहत भूमि अधिकार दिया जाए.

आंदोलनकारी समूहों ने कहा की कार्बी आंगलोंग एक अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है और मिकिर हिल्स डिस्ट्रिक्ट (भूमि हस्तांतरण अधिनियम) 1959 के अनुसार केवल आदिवासियों को इसमें भूमि अधिग्रहण का अधिकार है.

इसलिए आरएनएसएस द्वारा किया गया यह आग्रह गलत है. साथ ही वे सरकार से ये भी मांग कर रहे है की पीजीआर और वीजीआर के तहत बाहरी लोगों को भूमि अधिकार न दिया जाए.

इसके अलावा 15 फरवरी को खेरोनी इलाके में हुए कार्बी स्टूडेंट एसोसियेशन के सदस्यों के साथ मार-पिटाई ने विरोध प्रदर्शन को और तेज़ कर दिया है.

क्या है खेरोनी मामला

15 फरवरी, गुरूवार को करीब शाम 5 बजे कार्बी स्टूडेट एसोसिएशन के सदस्य डोंका में प्रदर्शन के बाद लौट रहे थे.

तभी रास्ते में (खेरोनी इलाके) कुछ लोगों ने उन पर हमला किया. हमले के दौरान करीब 5 लोगों के घायल होने की खबर आई है.

इसके अलावा गाड़ियों में भी तोड़-फोड़ की गई है. इसी सिलसिले में असम के डीजीपी जीपी सिंह ने कहा कि अभी तक मामले से जुड़े 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आपराधिक मामला दर्ज किया गया है.

15 फरवरी के दिन हुए इस मामले ने आदिवासियों को और अक्रोशित कर दिया है.

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