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मेलघाट में 8 दिन से पानी की सप्लाई नहीं, कोरकू कैसे जिंदा रहेगा?

महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र (Melghar Region) में करीब 8-10 दिन से पीने के पानी की सप्लाई नहीं की गई है. इस सिलसिले में एक याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court)में दाखिल की गई है.

अदालत फ़िलहाल मेलघाट में भीषण कुपोषण की वजह से मासूम बच्चों और माताओं की मौत के मामलों की सुनवाई कर रही है. 

मेलघाट क्षेत्र में कोरकू आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं. यह पहली बार नहीं है जब अदालत के सामने कुपोषण और पीने के साफ़ पानी उपलब्ध ना होने का मु्द्दा उठाया गया है. मेलघाट में कुपोषण के मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट पिछले 25-30 सालों से लगातार सुनवाई कर रहा है. 

वर्ष 2007 में डॉ. राजेंद्र बर्मा और सामाजिक कार्यकर्ताओं (जैसे पूर्णिमा उपाध्याय व डॉ. आशीष सताव) द्वारा दायर की गई जनहित याचिकाओं पर अदालत समय-समय पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाती रही है.

पिछले कुछ सालों में मेलघाट में कुपोषण को ख़त्म करने में सरकार की नाकामी पर अदालत ने कई बार सख़्त टिप्पणी की है – 

कोरकू समुदाय के लोग मुख्य रूप से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में रहते हैं. मध्यप्रदेश में यह आदिवासी खंडवा, बुरहानपुर, बैतुल, हरदा, और होशंगाबाद में मिलता है. जबकि महाराष्ट्र में कोरकू मेलघाट के धारणी और चिखलदरा तालुका में रहते हैं.

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