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पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों के गांवों में क्यों है दहशत का माहौल

इन दिनों पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाके के गांवों में डर और दहशत का माहौल है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के झारग्राम जिले के खेरेज़ोरा गांव में रात करीब 9 बजे टॉर्च, बांस, डंडे और कुल्हाड़ी लिए कुछ लोगों का एक समूह इलाके में गश्त कर रहा था.

खेरेज़ोरा अकेला गांव नहीं है. पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाके के झारग्राम और पश्चिम मिदनापुर जिलों के ऐसे सैकड़ों गांवों में सूरज ढलने के बाद डर का माहौल रहता है.

रात के समय आदिवासी गांवों में निगरानी झारग्राम से शुरू हुई लेकिन धीरे-धीरे पड़ोसी पश्चिम मिदनापुर जिलों में भी फैल गई.

इस डर और दहशत की वजह थी – अफवाहें कि बाहरी लोग और बदमाश घरों में घुसकर आधार कार्ड और वोटर ID कार्ड ले जा रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि यह सब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले और ऐसे समय में हो रहा है जब स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ड्राइव चल रही है.

झारग्राम जिले के गोपीबल्लपुर, झाड़ग्राम, संकरैल, जाम्बोनी इलाकों और पश्चिम मिदनापुर जिले के खड़गपुर 1, केशियारी, शालबोनी, गरबेटा-II ब्लॉक के गांव ऐसी अफवाहों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

झारग्राम के पुलिस सुपरिटेंडेंट, मानव सिंगला ने कहा, “ये अफवाहें हैं. पहले हमने असली दोषी को पहचानने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. फिर हमें एहसास हुआ कि ये अफवाहें हैं. हम सोशल मीडिया पर नज़र रख रहे हैं और हमारा अपना नेटवर्क भी है. हमें अभी भी जड़ का पता लगाना है. साथ ही हमने गांवों में रात की पेट्रोलिंग और अवेयरनेस प्रोग्राम बढ़ा दिए हैं.”

वहीं पश्चिम मेदिनीपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट, पलाश चंद्र धाली ने कहा, “अफवाहें झारग्राम से शुरू हुईं और दूसरी जगहों पर फैल गईं. हम गांवों में अवेयरनेस ड्राइव चला रहे हैं. हमने नाइट पेट्रोलिंग भी तेज़ कर दी है.”

18 से 60 साल के लोग रात में दे रहे पहरा

खेरेजोरा गांव में 18 से 60 साल के लोग रात में पहरा देते दिखे.

आमतौर पर रात की पहरा हर शाम करीब 8 बजे शुरू होती है और सुबह करीब 4 बजे तक चलती है. टॉर्च, लाठियों और यहां तक कि कुल्हाड़ियों से लैस होकर, युवा गांव में, जंगल के साथ-साथ उसकी सीमाओं पर भी गश्त करते हैं.

खेरेजोरा गांव में करीब सात दिन पहले रात की गश्त शुरू होने के बाद से हेमंत महतो (20) और उनके पिता बारी-बारी से गश्त कर रहे हैं.

हेमंत महतो ने कहा, “हमारी फूलों की दुकान है. मेरे पिता सुबह 7 बजे अपनी दुकान खोलते हैं. मैं रात 8 बजे से सुबह 3 बजे तक पहरा देता हूं. फिर मैं सो जाता हूं. मैं सुबह 9 बजे अपने पिता के साथ हमारी दुकान पर आता हूं यह हमारे गांव की सुरक्षा का सवाल है.”

वहीं 48 साल के रमेश महतो ने कहा, “हमने सुना है कि बदमाशों और बाहरी लोगों ने रात में पास के गांव में घुसने की कोशिश की है. इस मौसम में यह बहुत मुश्किल है लेकिन मुझे रात में जागना पड़ता है क्योंकि मैं परिवार का अकेला पुरुष सदस्य हूं.”

खेरेज़ोरा गांव की औरतें हालांकि रात में पेट्रोलिंग नहीं करती हैं फिर भी उनकी रातें बिना सोए गुज़र रही हैं.

महिलाएं अपने आंगनों में ग्रुप में बैठती हैं. उनका कहना है कि जब मर्द गांव के चारों ओर पहरा दे रहे हैं, तो हम कैसे सो सकते हैं?

गांव की महिलाओं का कहना है कि हमने बदमाशों को दरवाज़ा खटखटाते सुना है. अगर हम दरवाज़ा खोलते हैं तो वे घर में घुसकर आपका सामान छीन लेंगे, जिसमें आपका आधार कार्ड भी शामिल है.

खेरेजोरा गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर तुलसीबनी गांव में भी एक और ग्रुप चक्कर लगाता हुआ देखा गया.

तुलसीबनी के ग्रामीणों का कहना है कि अनजान लोग उनके गांव में घुस रहे हैं और हंगामा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें उन लोगों को रोकना होगा इसलिए गांववालों ने रात में पहरा देने का फैसला किया है. ऐसे में गांव के दस से पंद्रह जवान बांस, डंडे और कुल्हाड़ी लेकर रात में पेट्रोलिंग कर रहे हैं.

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत है, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरों से सुना है.

राज्य पुलिस अलर्ट मोड पर

इस बीच राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और पुलिस को अलर्ट किया है.

झारग्राम से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और फॉरेस्ट और कंज्यूमर अफेयर्स राज्य मंत्री बीरबाहा हंसदा ने कहा, “यह सच है कि ऐसी अफवाहें मुंहजबानी और सोशल मीडिया से फैलती हैं. हमने ब्लॉक और गांवों में अपने नेताओं के साथ मीटिंग की हैं. हर बार हमने पाया है कि ये घटनाएं सिर्फ अफवाहें हैं. हमने पुलिस को भी अलर्ट किया है. उन्होंने रात में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है. अभी तक हालात कंट्रोल में है.”

झारग्राम बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष तूफान महतो ने कहा, “ये अफवाहें हैं क्योंकि हमारे पास अभी कोई सबूत नहीं है. हमने पुलिस को अलर्ट कर दिया है. गिरफ्तारी के बाद ही हमें पता चलेगा कि ऐसी अफवाहें कहां से आईं. लेकिन स्थानीय लोग एकजुट हैं और अपने गांवों की रखवाली कर रहे हैं.”

(Representative image)

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