Site icon Mainbhibharat

त्रिपुरा में प्रद्योत किशोर माणिक्य का जादू क़ायम, TTADC चुनाव में भारी जीत

मैंने देखा था कि त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज़ ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के चुनाव में टिपरा मोथा चीफ़ प्रद्योत किशोर माणिक्य का जादू चल रहा था. अगरतला में उनके साथ इंटरव्यू में मैने सबसे पहला सवाल उनसे यही पूछा था कि यह कैसे संभव हो पाया है. 

आज मेरा अंदाज़ा बिलकुल सही साबित हुआ. लेकिन यहां मैं यह भी मानती हूं कि टिपरा मोथा TTAADC में इतनी बड़ी जीत हासिल करेगी, इसका अंदाज़ा मुझे नहीं हुआ था. 

28 सदस्यीय चुनाव में TIPRA मोथा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज करते हुए 24 सीटें हासिल की हैं.  इस जीत के साथ ही सहयोगी पार्टी भाजपा की मौजूदगी घटकर केवल 4 सीटों तक सिमट गई है. 

पिछले चुनाव में भाजपा के पास 8 सीटें थीं. इस बार चुनाव में TIPRA मोथा ने न सिर्फ अधिक सीटें जीतीं, बल्कि कई क्षेत्रों में बड़े अंतर से जीत हासिल की. हालांकि विस्तृत आंकड़े अभी चुनाव आयोग द्वारा संकलित किए जा रहे हैं.

पिछली बार की तरह इस चुनाव में भी भाजपा की सहयोगी इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT), और विपक्षी दल जैसे CPI(M) और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सके.

TTAADC के लिए 12 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसमें 83 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई. खास बात यह रही कि राज्य में सहयोगी होने के बावजूद भाजपा और TIPRA मोथा ने यह चुनाव अलग-अलग लड़ा. I

PFT, CPI(M) और कांग्रेस ने भी स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरकर किस्मत आजमाई.

अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2021 में TIPRA मोथा ने 18 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 9 सीटें मिली थीं और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी. बाद में भाजपा का एक सदस्य TIPRA मोथा में शामिल हो गया था.

TIPRA मोथा पार्टी की स्थापना साल 2019 में शाही परिवार से आने वाले प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने की थी, जिन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर इस पार्टी का गठन किया था.

इस बड़ी जीत के बाद प्रद्योत देबबर्मा ने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि “यह प्रेम की जीत है और नफरत की हार. TIPRA मोथा, भाजपा, IPFT, CPI(M) और कांग्रेस — हम सभी भाई हैं. हमें किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहना चाहिए।”

वहीं भाजपा के मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि जनता का फैसला सर्वोपरि होता है. उन्होंने माना कि अगर वोट विकास के आधार पर पड़ता तो भाजपा जीत सकती थी, लेकिन भावनात्मक मुद्दों पर वोटिंग का रुख अलग हो जाता है.

TTAADC त्रिपुरा के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है और यहां राज्य की लगभग एक-तिहाई आबादी निवास करती है। इस परिषद का गठन 1982 में किया गया था और बाद में इसे संविधान की छठी अनुसूची के तहत अधिक स्वायत्तता प्रदान की गई.

इतिहास की बात करें तो यह परिषद लंबे समय तक CPI(M) के नियंत्रण में रही. वर्ष 2000 में कांग्रेस-ट्रिपुरा उपजाति जुबा समिति (TUJS) ने सत्ता संभाली थी, इसके बाद 2000 से 2005 तक IPFT का शासन रहा. 

वर्ष 2021 में TIPRA मोथा ने पहली बार यहां सत्ता हासिल की थी, जिसे अब 2026 के चुनाव में और मजबूत जनादेश मिला है.

यह परिणाम त्रिपुरा की आदिवासी राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जहां TIPRA मोथा ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. इस चुनाव ने बेशक टिपरा मोथा चीफ़ प्रद्योत किशोर माणिक्य को राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना दिया है. अगले विधानसभा चुनाव में वे खुद को कैसे पोजिशन करते हैं, अब यह देखना दिलचस्प होगा.

Exit mobile version