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आदिवासी वोटों को एकजुट करने के लिए कांग्रेस की असम चुनाव में JMM से गठबंधन की कोशिश

असम में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी रणनीतिक रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ गठबंधन करने की कोशिश कर रही है.

इस संभावित गठबंधन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी वोटों को एकजुट करना है क्योंकि राज्य की कई सीटों पर आदिवासी मतदाता चुनाव परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.

असम में आदिवासी समुदाय का राजनीतिक प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस और JMM मिलकर इस वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं.

कांग्रेस का मानना है कि क्षेत्रीय दलों, खासकर आदिवासी समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले JMM के साथ गठबंधन करने से उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम चुनाव के पर्यवेक्षकों में से एक बंधु तिर्की ने मंगलवार को टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को बताया कि ऊपरी असम क्षेत्र की 38 सीटों पर आदिवासी आबादी चुनाव के नतीजों में अहम भूमिका निभाएगी.

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की कोशिशें की जा रही हैं कि INDIA गठबंधन एकजुट रहे.

असम की 126 विधानसभा सीटों पर वोटिंग 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगी और वोटों की गिनती 4 मई को होगी.

JMM, जिसने पहले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, अपनी योजनाओं को सार्वजनिक करने में थोड़ा समय ले रही है.

चुनाव से पहले हेमंत ने असम में दो रैलियों को संबोधित किया.

तिर्की ने कहा, “मुख्यमंत्री के दौरों से वहां (असम) आदिवासियों के एक तबके में निश्चित रूप से उम्मीदें जगी हैं, क्योंकि वहां के आदिवासियों को लंबे समय से ठगा जा रहा है. निवर्तमान सरकार ने उनकी समस्याओं को हल करने के लिए कुछ नहीं किया और लोगों में बदलाव की ज़बरदस्त चाह है. ऐसी स्थिति में वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए एक एकजुट INDIA गठबंधन हमेशा फ़ायदेमंद साबित होगा.”

तिर्की ने आगे कहा कि गोगोई के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने हेमंत से मुलाक़ात की थी, क्योंकि कांग्रेस अपने सहयोगियों और समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है.

असम रवाना होने से पहले तिर्की ने कहा, “हम हेमंत सोरेन जी और उनकी पार्टी की योजनाओं के बारे में सुनने का इंतज़ार कर रहे हैं.”

तिर्की ने दावा किया कि झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के 70 लाख आदिवासी दशकों से असम में रह रहे हैं, जहां वे चाय बागानों में काम करने के लिए गए थे.

उन्होंने कहा, “हालांकि, वे आज भी वहां अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत ज़मीन के पट्टे और उचित मज़दूरी भी नहीं मिल रही है. ऊपरी असम क्षेत्र की कम से कम 38 सीटों पर आदिवासी आबादी चुनाव का रुख़ बदल सकती है.”

संपर्क किए जाने पर JMM के महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि पार्टी जल्द ही अपनी चुनावी रणनीति का खुलासा करेगी.

उन्होंने कहा, “अगले दो-तीन दिनों में असम चुनाव से जुड़ी सभी जानकारी सामने आ जाएगी। JMM निश्चित रूप से चुनाव लड़ेगी, और इसीलिए हमने सोमवार को ही चुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है,”

अगर यह गठबंधन औपचारिक रूप लेता है तो यह असम के चुनावी समीकरण को बदल सकता है और सत्तारूढ़ दल के खिलाफ विपक्ष की स्थिति को मजबूत कर सकता है.

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