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फग्गन सिंह कुलस्ते ने क्यों किया मंत्री बनने से इनकार


लोकसभा चुनाव 2024 समाप्त हो चुके हैं. बीजेपी तीसरी बार केंद्र में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई.

लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में इस बार सभी सामान्य और आरक्षित सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. राज्य की 29 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है.

मोदी सरकार ने इस बार अपने मंत्रिमंडल में मध्य प्रदेश से 5 सांसद लिए हैं. लेकिन कई पुराने सांसदों का नाम मंत्रिमंडल से हटा दिया गया है.

इसी सिलसिले में ऱाज्य के आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते ने एक बड़ा खुलासा किया है.

इस बार जिन नेताओं को बीजेपी ने अपने मंत्रिमंडल से हटाया है, उसमें फग्गन सिंह कुलस्ते का भी नाम शामिल है.

बीजेपी से तीन बार मंत्री रहे चुके फग्गन कुलस्ते ने खुलासा किया कि उन्हें राज्य मंत्री बनने का ऑफर मिला था. लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें कैबिनेट में शामिल होना था.

फग्गन सिंह कुलस्ते मंडला के निवास इलाके में मतदाताओं का आभार व्यक्त करने गए थे. तभी जब उनसे यह पूछा गया की वे इस बार मंत्री क्यों नहीं बने?

तो उन्होंने जवाब में कहा कि मैं तीन बार राज्यमंत्री (एमओएस) रहा हूं. चौथी बार राज्यमंत्री बनना मुझे ठीक नहीं लगा. इसलिए मैंने साफ इनकार कर दिया. मैने कहा कि अगर मैं कैबिनेट मंत्री बन गया तो ठीक रहेगा. इसके अलावा मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है.

कौन है फग्गन सिंह कुलस्ते?
कुलस्ते बीजेपी की पिछली सरकार में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री थे. मध्य प्रदेश में 6 सीटे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. इनमें से एक सीट मंडला भी है.

मंडला सीट फग्गन सिंह कुलस्ते की पांरपरिक सीट रही है. वह यह लोकसभा सीट सात बार जीत चुके हैं.
उन्होंने यह सीट सिर्फ 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में हारी थी.

1999 से 2004 के दौरान अटल बिहारी वायपेयी के प्रधानमंत्री रहते समय वह जनजातीय और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री रहे चुके हैं.

वहीं 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में फग्गन सिंह कुलस्ते की हार हो गई. इसके बावजूद भी बीजेपी ने मंडला सीट से फग्गन सिंह कुलस्ते को चुना था.

बीजेपी का यह फैसला उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ. इसके अलावा कुलस्ते का नाम एक बार कैश-फॉर वोट घोटाले में जोड़ा गया था.

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