असम में दर्जनों पुलिसकर्मियों ने आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले प्रमुख कार्यकर्ता प्रणब डोली और दो अन्य पुरुषों को गिरफ्तार कर लिया है.
वहीं, पुलिस की दबिश के बाद दो अन्य आरोपियों ने खुद ही अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया.
रविवार को पुलिस ने उस घर को चारों तरफ से घेर लिया जहाँ प्रणब डोली रुके हुए थे. डोली का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी अरेस्ट वारंट (गिरफ्तारी पत्र) के उन्हें हिरासत में ले लिया.
उनकी इस अचानक हुई गिरफ्तारी का वीडियो भी कैमरे में कैद हुआ है.
क्यों हुई गिरफ्तारी?
प्रणब डोली पिछले कई सालों से पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आदिवासियों के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ अभियान चला रहे थे.
वह प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास बन रहे एक पांच-सितारा हयात होटल के खिलाफ भी लगातार आवाज उठा रहे थे. आरोप ये है कि यह होटल उस जमीन पर बनाया जा रहा है जिस पर स्थानीय आदिवासी लोगों का कानूनी अधिकार है.
अपनी गिरफ्तारी के वक्त मिसिंग (Mising) आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले प्रणब डोली ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगरहमेंजनताकीआवाजउठानेकीअनुमतिनहींहै, तोयहकैसालोकतंत्रहै? जोपुलिसमुझेगिरफ्तारकरनेआई, उसनेकोईवारंटतकनहींदिखाया.”
काजीरंगा पार्क का हिंसक इतिहास
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान अपने गार्डों द्वारा स्थानीय आदिवासियों पर किए जाने वाले अत्याचारों के लिए लंबे समय से विवादों में रहा है. इन आदिवासियों को पहले इस पार्क के अंदर से बेदखल किया गया था और अब वे इसके बाहरी किनारों पर रहने को मजबूर हैं.
सालों से इस पार्क में ‘देखते ही गोली मारने’ (शूट ऑन साइट) की सख्त नीति लागू है, जिसके कारण दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, काजीरंगा में रेंजरों ने 20 वर्षों में 106 लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतारा है.
होटल परियोजना का विरोध
खबरों के मुताबिक, इस हयात होटल के निर्माण की वजह से अब तक 45 से ज्यादा आदिवासी परिवारों को अपनी जमीन से बेदखल होना पड़ा है और सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है.
यह असम सरकार की उस बड़ी योजना का हिस्सा है जिसके तहत पार्क के आसपास की जमीनों को लक्जरी रिसॉर्ट बनाने के लिए निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है.
मानवाधिकार संगठनों ने जताई आपत्ति
‘ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी’ (GKLHRPC), जिसके संयोजक खुद प्रणब डोली हैं, ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:
“हम प्रणब डोली और अन्य कार्यकर्ताओं पर लगाए गए इन झूठे और टारगेटेड आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं. हम इस गैर-कानूनी गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. असम सरकार को आदिवासी कार्यकर्ताओं को परेशान करना बंद करना चाहिए जो प्रभावित समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं.”

