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ओडिशा: खनन-विरोधी झड़प के छह महीने बाद, पुलिस ने दो आदिवासी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

ओडिशा के रायगडा जिले में 6 महीने पहले हुई एक झड़प के सिलसिले में आदिवासी अधिकारों के दो कार्यकर्ताओं, डॉक्टर रैंडल सिक्वेरा और लक्ष्मण नायक को गिरफ्तार किया गया है.

एक नागरिक समाज संगठन ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि इसका मकसद अन्याय के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को रोकना था.

पुलिस ने मंगलवार (20 अक्टूबर, 2026) को इन आरोपों को खारिज कर दिया. पुलिस का दावा है कि अप्रैल 2026 में इलाके में खनन गतिविधियों के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान, इन दोनों ने कांतामल गांव में आदिवासियों को सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने के लिए उकसाया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि काशीपुर पुलिस ने 16 अक्टूबर की रात कालाहांडी में उनके घरों से इन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और उन्हें अदालत में पेश किया.

अधिकारी ने बताया कि उन पर हत्या के प्रयास और दंगा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं और उनके खिलाफ ‘आर्म्स एक्ट’ के तहत मामला दर्ज किया गया है.

नागरिक समाज समूह, ‘कंसर्न्ड सिटीजन्स कमिटी, ओडिशा’ ने इन गिरफ्तारियों की निंदा की है. समूह का आरोप है कि इन दोनों को केवल इसलिए हिरासत में लिया गया ताकि “अन्याय के खिलाफ आदिवासियों की लड़ाई को रोका जा सके और ‘जल, जंगल और जमीन’ जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों के लिए हो रहे संघर्ष को विफल किया जा सके.”

साउथ वेस्टर्न रेंज के DIG अखिलेशवर सिंह ने इन गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि डॉक्टर सिक्वेरा स्थानीय समुदायों को चिकित्सा सेवाएं नहीं दे रहे थे, बल्कि वे राज्य सरकार के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट करने में लगे थे.

उन्होंने नायक पर भी लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया.

अखिलेशवर सिंह ने फोन पर न्यूज एजेंसी PTI को बताया, “गिरफ्तार किए गए लोग निर्दोष नहीं हैं. डॉक्टर रैंडल सिक्वेरा लोगों को चिकित्सा सेवाएं नहीं दे रहे थे बल्कि आदिवासियों को राज्य सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे. नायक भी लोगों को गुमराह कर रहे थे. पुलिस किसी निर्दोष व्यक्ति को, खासकर एक डॉक्टर को, क्यों गिरफ्तार करेगी?”

अधिकारी ने कहा कि कालाहांडी और रायगडा जिलों में कई डॉक्टर काम कर रहे हैं लेकिन डॉ. सिक्वेरा के अलावा किसी और को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए अखिलेश्वर सिंह ने कहा, “जो लोग उनके निर्दोष होने का दावा कर रहे हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि क्या डॉक्टर वास्तव में लोगों को चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे या उन्हें भड़का रहे थे.”

पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोपों पर DIG ने कहा कि इन दोनों ने अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी.

क्या है पूरा मामला?

साल 2023 में सरकार द्वारा बॉक्साइट खनन को मंजूरी दिए जाने के बाद से सिजीमाली पहाड़ी क्षेत्र विवाद का केंद्र बन गया है. शगबारी गांव के पास सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते 7 अप्रैल को पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच फिर से झड़प हो गई. इस घटना में कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.

पुलिस ने बताया कि हालांकि मूल FIR में सिक्वेरा और नायक का नाम नहीं था लेकिन जांच के दौरान उनकी संलिप्तता सामने आई.

पुलिस के अनुसार, “इन दोनों ने आदिवासी निवासियों को पुलिस बल पर हमला करने के लिए उकसाया था.”

जयराम रमेश ने गिरफ्तारियों की निंदा की

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इन गिरफ्तारियों की निंदा की और कहा कि ये दोनों कार्यकर्ता बॉक्साइट खनन परियोजनाओं के खिलाफ दलित और आदिवासी समुदायों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे थे.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह ओडिशा में दमन के एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत पिछले तीन वर्षों में 43 पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं और 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है.”

सांसद ने कहा, “सिजीमाली में ग्राम सभा की सहमति में हेराफेरी (फर्जीवाड़ा) करने के गंभीर आरोप हैं. कांग्रेस ने भाजपा शासित राज्यों में ‘अंगूठा चोरी’ (फर्जी सहमति लेने) के ऐसे कई मामलों को दर्ज किया है. इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि प्रस्तावित खदानों में से एक ‘मोदानी’ (अडानी) परियोजना है.”

कोरापुट के सांसद सप्तगिरी उलाका ने ‘X’ पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष और रायगडा के विधायक के. अप्पाला स्वामी के साथ मिलकर, रायगडा जेल में सेक्वेरा, लक्ष्मण नायक और लाडो सिकाका से उनके वकील की मौजूदगी में मुलाकात की.

उन्होंने कहा, “हम आगे के कदमों पर काम कर रहे हैं. हमने उन्हें कानूनी और ज़मीनी स्तर पर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है.”

यह कार्रवाई आदिवासी समुदाय के खिलाफ

सिविल सोसाइटी ग्रुप ने सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों से एकजुटता दिखाने और ओडिशा के लोगों के लिए ‘जल, जंगल और जमीन’ की लड़ाई लड़ रहे लोगों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया.

मानवाधिकार समूह ‘कंसर्न्ड सिटीजन्स कमिटी, ओडिशा’ ने इन गिरफ्तारियों की निंदा की है. समूह का आरोप है कि यह कार्रवाई आदिवासी समुदाय के न्याय के संघर्ष और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को दबाने के लिए की गई है.

उन्होंने आगे कहा कि ये गिरफ्तारियां आदिवासी और दलित समुदायों के खिलाफ राज्य द्वारा किए जा रहे दमन का हिस्सा हैं; ये समुदाय खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण अपनी ज़मीन और प्राकृतिक संसाधनों के छिनने का विरोध कर रहे हैं.

संगठन ने बताया कि श्री नाइक ‘मा माटी माली सुरक्षा मंच’ और ‘समाजवादी जन परिषद’ के एक प्रमुख दलित कार्यकर्ता हैं, जबकि डॉक्टर सिक्वेरा कालाहांडी और रायगडा जिलों में आदिवासी समुदायों के साथ काम कर रहे हैं.

समिति ने यह भी बताया कि इन दोनों कार्यकर्ताओं ने उन स्थानीय आंदोलनों का समर्थन किया है, जो खनन और औद्योगीकरण के बुरे प्रभावों का विरोध करते हैं और आदिवासी समुदायों की बस्तियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

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