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आंध्र प्रदेश: क्लोरोक्विन की गोलियां दिए जाने के बाद 7 साल की बच्ची की मौत, 53 लोग अस्पताल में भर्ती

मुख्यमंत्री ने ज़िला अधिकारियों को बेहतरीन मेडिकल सुविधा देने और घटना की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया.

आंध्र प्रदेश के पोलावरम ज़िले के येतापाका मंडल के गोल्लागुप्पा गांव (Gollaguppa village) में मंगलवार को क्लोरोक्विन की गोली (Chloroquine tablet) दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद मादिवि जमुना (Madivi Jamuna) नाम की 7 साल की कोया आदिवासी लड़की की मौत हो गई. जबकि 53 ग्रामीणों (जिनमें ज़्यादातर बच्चे थे) को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गाँव में मलेरिया के मामले सामने आने के बाद एहतियात के तौर पर लक्ष्मीपुरम प्राइमरी हेल्थ सेंटर की टीम ने मंगलवार को गोल्लागुप्पा गाँव में 71 लोगों को क्लोरोक्विन की गोलियाँ दी थीं.

मंगलवार तक गाँव में मलेरिया के कम से कम पाँच मामले सामने आ चुके थे.

जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “कुल 28 ग्रामीणों (जिनमें ज़्यादातर बच्चे हैं) को भद्राचलम सरकारी अस्पताल भेजा गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर है. उन सभी को क्लोरोक्विन की गोलियां दी गई थीं.”

इसके अलावा, 24 ग्रामीणों को येतापाका मंडल के लक्ष्मीपुरम PHC में भर्ती कराया गया है.

राज्य स्तर, काकीनाडा, राजमुंदरी और विजयवाड़ा की तीन स्पेशलाइज़्ड मेडिकल टीमें, तीन बाल रोग विशेषज्ञों के साथ, मरीज़ों की निगरानी कर रही हैं.

गोल्लागुप्पा में एक खास मेडिकल कैंप भी चल रहा है.

घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण और स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव ने बुधवार को गोल्लागुप्पा घटना की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.

वहीं पोलावरम के कलेक्टर के. दिनेश कुमार ने बुधवार सुबह भद्राचलम एरिया हॉस्पिटल का दौरा करके मेडिकल सुविधाओं का जायजा लिया और भरोसा दिलाया कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.

उन्होंने पुष्टि की कि सभी प्रभावित मरीज़ तेज़ी से ठीक हो रहे हैं और उनकी हालत स्थिर है.

स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी देते हुए कलेक्टर ने बताया कि डॉक्टरों को जमुना की मौत के पीछे दिल से जुड़ी समस्या का शक है. उसके परिवार में पहले भी दो बच्चों की अज्ञात कारणों से मौत हो चुकी थी, जिसके चलते जेनेटिक हार्ट कंडीशन और क्लोरोक्विन की वजह से होने वाली अतालता (arrhythmia) की जांच की जा रही है. उल्टी होना दवा का एक जाना-माना साइड-इफेक्ट है. जांच के लिए गोलियों के सैंपल विज़ाग की लैब में भेजे गए.

मुख्यमंत्री ने ज़िला अधिकारियों को बेहतरीन मेडिकल सुविधा देने और घटना की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया.

मृत बच्ची के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अधिकारियों को पूरे गोल्लागुप्पा में घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करने का निर्देश दिया.

SFI ने विस्तृत जांच की मांग की

उधर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) की भद्राचलम टाउन कमिटी ने मादिवि जमुना की मौत की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की.

बुधवार सुबह, टाउन कमिटी के सेक्रेटरी के. रविंदर के नेतृत्व में SFI के एक प्रतिनिधिमंडल ने भद्राचलम के सरकारी एरिया हॉस्पिटल में भर्ती गोल्लागुप्पा के कई बीमार आदिवासी बच्चों से मुलाक़ात की.

एक बयान में के. रविंदर ने भद्राचलम से सटे येतापाका सहित पांच ग्राम पंचायतों में पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति और आपातकालीन चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की.

उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि भद्राचलम एजेंसी की सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पांच ग्राम पंचायतों से संबंधित ‘प्रशासनिक मुद्दों’ को जल्द से जल्द हल किया जाए.

रविंदर ने आगे मांग की कि आंध्र प्रदेश सरकार जमुना के शोक संतप्त परिवार को ₹10 लाख की अनुग्रह राशि प्रदान करे.

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