केरल: 18 महीने कोविड-19 से बचे रहने के बाद महामारी ने एडमलकुडी में आखिर दे ही दी दस्तक

दो हफ़्ते पहले ही सांसद डीन कुरियाकोस काफ़ी चर्चा में आए, जब उन्होंने एक ब्लॉगर के साथ इस आदिवासी ग्राम पंचायत का दौरा किया. फ़िलहाल स्वास्थ्य अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि दो आदिवासी संक्रमित कैसे हुए.

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कोविड महामारी के शुरु होने के क़रीब डेढ़ साल बाद अब पहली बार केरल के एडमलकुडी आदिवासी ग्राम पंचायत में COVID-19 ने दस्तक दे दी है. बस्ती में इस हफ़्ते दो केस सामने आए हैं.

इरुम्पुकल्लुकुडी की 40 साल की एक गृहिणी और इड्डलीपाराकुडी के एक 24 साल के व्यक्ति को कोविड हो गया है.

गृहिणी का कोट्टयम मेडिकल कॉलेज में कोविड​​-19 के लिए टेस्ट किया गया था, जब उन्हें किसी बीमारी के लिए भर्ती कराया गया था. बाद में मुन्नार के एक निजी अस्पताल में उनके कोविड पॉज़िटिव होने का पता चला.

आपको याद होगा कि एडमलकुडी ग्राम पंचायत ने कोविड महामारी के शुरु होते ही बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया था. सिर्फ़ एमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारियों को ही एडमलकुडी में प्रवेश की अनुमति है.

इसके अलावा कोविड के दिशा-निर्देशों का यहां सख्ती से पालन किया जा रहा था. शारीरिक दूरी, हाथों का हाइजीन, उचित मास्किंग और यात्रा पर प्रतिबंध जैसे नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा था.

लेकिन, दो हफ़्ते पहले ही सांसद डीन कुरियाकोस काफ़ी चर्चा में आए, जब उन्होंने एक ब्लॉगर के साथ इस आदिवासी ग्राम पंचायत का दौरा किया. फ़िलहाल स्वास्थ्य अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि दो आदिवासी संक्रमित कैसे हुए.

इस इलाक़े में बहुसंख्यक आबादी मुडुवा जनजाति की है. कोविड की रोकथाम के लिए एडमलकुडी से प्रेरित कई आदिवासी बस्तियों ने खुद का लॉकडाउन लागू किया था.

एक पहाड़ी इलाके पर बसे इस गांव का बाहरी दुनिया से सड़क संपर्क नहीं है, और यह काफ़ी हद तक आत्मनिर्भर है. यहां के अधिकांश लोग आसपास के वन और जनजातीय विभागों में काम करते हैं.

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