आदिवासी प्रमुख की गिरफ़्तारी गूंजी विधान सभा में और मुख्य मंत्री को देना पड़ा जवाब

जब विधान सभाओं या संसद में कभी कभार ही किसी आदिवासी मसले पर चर्चा सुनाई देती है. उस दौर में आपसी झगड़े में एक आदिवासी समुदाय के प्रमुख को हिरासत में लेने का मामला विधान सभा में गूंजे तो बड़ी बात लगती है.

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ऐसे दौर में जब बड़े बड़े आदिवासी नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी आम बात हो गई है. जब उनके बारे में मीडिया तक में बात नहीं होती है.

जब विधान सभाओं या संसद में कभी कभार ही किसी आदिवासी मसले पर चर्चा सुनाई देती है. उस दौर में आपसी झगड़े में एक आदिवासी समुदाय के प्रमुख को हिरासत में लेने का मामला विधान सभा में गूंजे तो बड़ी बात लगती है.

यह ख़बर केरल राज्य से आई है जहां ना सिर्फ़ विधान सभा में यह मामला आया, बल्कि ख़ुद मुख्य मंत्री पिनाराई विजयन को इस मामले में सफ़ाई देनी पड़ी.

केरल विधान सभा में विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने एक आदिवासी मुखिया और उसके बेटे को ग़िरफ़्तार करने का मामला उठाया.

विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य के सबसे पिछड़े आदिवासी बस्तियों में से एक के मुखिया और उनके बेटे की गिरफ्तारी ग़लत है. केरल के अट्टापडी में हुई इस घटना को विपक्ष ने पुलिस अत्याचार का एक स्पष्ट मामला करार दिया.

उधर मुख्यमंत्री ने पुलिस का समर्थन किया और कहा कि आजकल पुलिस बल के खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत कहानियों का प्रचार करने का चलन हो गया है.  उन्होंने कहा कि पुलिस कानून लागू कर रही थी. 

केरल के मुख्य मंत्री विजयन

उन्होंने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि इस घटना में किसी तरह की कोई ग़लती नहीं हुई है. 

पुलिस ने रविवार को पलक्कड़ जिले के अट्टापडी के आदिवासी इलाके के शोलायुर में वट्टलक्की गांव के प्रमुख चोरिया मूप्पन और उनके बेटे मुरुगन को गिरफ़्तार किया था. उनके पड़ोसी कुरुन्थाचलम नाम के व्यक्ति ने उनकी शिकायत की थी. 

स्थानीय टीवी चैनलों ने इस घटना के दृश्य प्रसारित किए थे. इस वीडियो में गांव के अन्य लोग पुलिस को आदिवासी प्रमुख की गिरफ़्तारी से रोकने की कोशिश कर रहे थे.

सीएम ने कहा कि आदिवासी मुखिया और उनके बेटे पुलिस के साथ जाने को तैयार नहीं थे. इसके अलावा बस्ती के अन्य आदिवासियों के समर्थन से गिरफ्तारी का विरोध करने की कोशिश की.  

इस घटना में एक महिला कांस्टेबल समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. 

उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के समय और कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में राहत और बचाव कार्यों में पुलिस बल के योगदान को नहीं भूलना चाहिए.

विजयन ने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि कबायली सरदार और उनके बेटे को पुलिस ने बलपूर्वक पकड़ लिया था और इस कृत्य के पीछे सत्तारूढ़ सीपीएम का हाथ था. 

मुख्यमंत्री ने कहा, “पुलिस एक अपराध से संबंधित शिकायत के संबंध में कार्रवाई करने के लिए गांव गई थी.  पुलिस द्वारा कानून के शासन को बनाए रखने के लिए यह केवल एक सामान्य कदम था.”

पुलिस कार्रवाई को सही ठहराते हुए और बल की प्रशंसा करते हुए विजयन ने कहा कि उनकी पुलिस कानून के शासन और लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए खड़ी है. इसके अलावा, सरकार बल को एक ऐसी प्रणाली में बदलने में सफल रही है जो लोगों की हर मुश्किल में उनके साथ खड़ी हो.

उन्होंने अपनी सरकार की कई योजनाओं का ज़िक्र किया जो आदिवासी विकास के लिए तैयार की गई हैं. उन्होंने दावा किया है कि  कि राज्य में समुदाय के लोगों के खिलाफ अत्याचार को रोकने और उन्हें सभी आवश्यक कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक प्रभावी प्रणाली स्थापित की गई है.

मुख्य मंत्री ने यह भी बताया है कि इस पूरे मामले में जल्दी से जल्दी जाँच पूरी करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं. मुख्य मंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद विपक्ष ने सदन से वॉक आउट किया. 

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