तमिल नाडु: ज़िला प्रशासन आया हरकत में, आदिवासी बस्ती में स्वास्थ्य केंद्र पर काम शुरु

लगभग एक साल पहले 11.8 लाख रुपए की लागत से एक नए उप-स्वास्थ्य केंद्र को बनाने के लिए मंज़ूरी दी गई थी. लेकिन काम इसलिए अटक गया क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए पहचानी गई 30 सेंट ज़मीन कुरुमलई आरक्षित वन के तहत आती है, और वन विभाग से इसके इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी नहीं मिली थी.

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तमिल नाडु के वेल्लोर ज़िले में आनईकट्ट के पास कुरुमलई पहाड़ी पर एक आदिवासी बस्ती में उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण का काम बुधवार से शुरू हो गया.

दो दिन पहले ही यहां एक 31 साल की आदिवासी महिला के बीमार पड़ने पर एक अस्थायी कपड़े के स्ट्रेचर में डालकर तलहटी पर बसे एक दूसरे गांव के निजी अस्पताल में ले जाने की ख़बर सामने आई थी. पहाड़ी पर बसे आदिवासी गांवों में उचित उप-स्वास्थ्य केंद्रों की कमी के चलते, अतियूर से लगभग 15 किमी दूर उसूर गांव में उसका इलाज किया गया था.

इसके बाद, जिला प्रशासन के स्वास्थ्य, राजस्व, समाज कल्याण, वन और ग्रामीण विकास समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने बुधवार को पहाड़ी पर स्थित आदिवासी बस्ती का निरीक्षण किया. उन्होंने अपने दौरे पर पहाड़ी पर बसे दूरदराज की आदिवासी बस्तियों तक सड़क पहुंच प्रदान करने की संभावना का आकलन किया.

31 साल की आदिवासी महिला को डोली में हालकर 15 किमी दूर एक निजी अस्पताल ले जाया गया था

इसके अलावा उन्होंने अपने दौरे पर उप-स्वास्थ्य केंद्र के लिए काम की शुरुआत भी कराई. जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) की परियोजना निदेशक के. आरती ने एक अखबार को बताया कि सरकारी भूमि पर बनाए जा रहे इस उप-स्वास्थ्य केंद्र का काम तीन महीने में पूरा हो जाएगा.

लगभग एक साल पहले 11.8 लाख रुपए की लागत से एक नए उप-स्वास्थ्य केंद्र को बनाने के लिए मंज़ूरी दी गई थी. लेकिन काम इसलिए अटक गया क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए पहचानी गई 30 सेंट ज़मीन कुरुमलई आरक्षित वन के तहत आती है, और वन विभाग से इसके इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी नहीं मिली थी.

नतीजतन, राजस्व अधिकारियों ने 6,000 वर्ग फुट के एक दूसरे भूखंड की पहचान की जो राज्य सरकार की ज़मीन है, और बुधवार को निर्माण का काम शुरू हो गया.

जब तक केंद्र बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक गांव के सरकारी स्कूल के एक हिस्से में अभी की तरह टेंपररी रूप से स्वास्थ्य केंद्र चलाया जाएगा.

सड़क निर्माण की संभावना का आकलन करने के लिए सड़क निरीक्षकों ने हर 50 मीटर पर पहाड़ी को मापा. उन्होंने पाया है कि 2.5 किमी लंबे पथ में से दो किमी आरक्षित वन के अंदर आता है, जहां सिर्फ़ तीन फीट की चौड़ाई ही मिल सकती है.

अधिकारियों ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के तहत जिला वन अधिकारी (डीएफओ) एक हेक्टेयर तक के आरक्षित वन में भूमि अधिग्रहण की मंजूरी दे सकता है.

फ़िलहाल डीआरडीए को आरक्षित वन में से 0.6 हेक्टेयर भूमि की ही ज़रूरत है ताकि मौजूदा 3-फुट-चौड़ी सड़क को चौड़ा कर 10-फुट बिटुमेन रोड बनाई जा सके. इससे वेल्लकल बस्ती के निवासियों को कुरुमलाई तक पहुंचने के लिए सड़क मिल जाएगी.

सड़क के काम के लिए कागजी कार्रवाई में तेजी लाने के लिए कलेक्टर पी कुमारवेल पांडियन के नेतृत्व में डीएफओ (वेल्लोर) और जिला प्रशासन के बीच एक बैठक जल्द ही आयोजित की जाएगी.

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