Unacademy के शिक्षक ने कहा आदिवासियों के पास नहीं होता है दिमाग

TIPRA के अध्यक्ष प्रद्योत देबबर्मा ने ट्विटर पर विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो की निंदा करने का आह्वान किया और कहा कि देश में नस्लवाद मौजूद है. उन्होंने ट्विटर पर पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी टैग किया.

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ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म Unacademy ने अपने UPSC परीक्षा तैयारी वीडियो में आदिवासी लोगों को “ब्रेनलेस” बताकर विवाद खड़ा कर दिया है. Unacademy के एक शिक्षक को आदिवासियों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षक को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

ट्विटर पर शेयर किए गए इस वी़डियो में फैकल्टी सिद्धार्थ सिंह मिशन आईएएस 2021 के तहत भूगोल विषय की अपनी कक्षा ले रहे थे और उस दौरान वह झूम खेती के बारे में बात कर रहे थे और वह पूर्वोत्तर के आदिवासी किसानों के खिलाफ बेहद नस्लवादी भाषा का इस्तेमाल करते हैं.

हिंदी में झूम की खेती के बारे में बात करते हुए, फैकल्टी सिद्धार्थ सिंह कहते हैं, “झूम खेती की प्रथा का पालन अक्सर आदिवासी लोग करते हैं. उनके पास अक्सर दिमाग नहीं होता और न ही उनके पास कोई आधिकारिक भूमि दस्तावेज होता है.”

सोशल मीडिया यूजर्स ने जल्द ही Unacademy के शिक्षक द्वारा नस्लीय टिप्पणियों वाला वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. बाद में हंगामा होने पर इस वीडियो को ऐप से हटा दिया गया

अरुणाचल प्रदेश की एक महिला हीनू, जिन्होंने वीडियो पर ध्यान दिया और ट्विटर पर उसी के बारे में पोस्ट किया और उन्होंने कहा कि उनकी अस्वीकार्य अपमानजनक टिप्पणी पर @unacademy और सिद्धार्थ सिंह को बिना शर्त जल्द से जल्द सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए.

वहीं सनी बोरी ने ट्वीट किया, “उसे देश के बारे में कुछ ज्ञान लेने और फिर आईएएस बनाने के लिए कहो. तथाकथित पढ़े-लिखे शिक्षक ने कितनी आसानी से वह टिप्पणी कर दी, वह भी एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म पर. साथ ही YouTube और Unacademy पर इसे पब्लिश किया.”

जबकि TIPRA के अध्यक्ष प्रद्योत देबबर्मा ने ट्विटर पर विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो की निंदा करने का आह्वान किया और कहा कि देश में नस्लवाद मौजूद है. उन्होंने ट्विटर पर पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी टैग किया.

उन्होंने ट्वीट किया, “मैं पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों और भारत के अलग-अलग हिस्सों के सीएम से इस शिक्षा के खिलाफ लिखने का आग्रह करता हूं जो हमारे छात्रों को दी जा रही है. इस देश में जातिवाद मौजूद है चाहे हम कितनी भी बार इसे अस्वीकार करने का प्रयास करें.”

देश के सबसे बड़े एड-टेक यूनिकॉर्न में से एक Unacademy ने एक बयान जारी किया है और वीडियो पर खेद व्यक्त किया और कहा है कि इसने शिक्षक को उनके आंतरिक आचार संहिता दिशानिर्देशों के अनुपालन में दंडित किया है.

फर्म ने एक बयान में कहा कि यह ध्यान में लाया गया है कि सिंह ने स्वदेशी जनजातियों के लोगों के खिलाफ भेदभावपूर्ण और आहत करने वाली टिप्पणी की.

अनएकडेमी ने मूल वीडियो को हटा दिया है और हमारे आंतरिक आचार संहिता दिशानिर्देशों के अनुपालन में शिक्षक को दंडित किया है. Unacademy ने शिक्षक द्वारा की गई टिप्पणियों और टिप्पणी से हुई चोट के लिए बिना शर्त खेद व्यक्त किया.

यह पहली बार नहीं है कि किसी ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ने पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित विषयों पर विवाद खड़ा किया है. पिछले महीने लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘ग्रेडअप’ ने एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें असम के ‘गामुसा’ को एक जानवर के रूप में बताया गया था. मंच ने बाद में खेद व्यक्त किया था.

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