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मध्य प्रदेश : जनजातीय विकास मिशन के मामले में फिसड्डी, घोषणाओं में नंबर वन है

लेकिन जब ख़र्च पर निगाह डालते हैं तो पता चलता है कि साल 2018-19 में अगर राज्य में 3237 करोड़ रूपया ख़र्च ही नहीं हो पाया था तो अगले साल पता चलता है कि इसका लगभग दोगुना पैसा ख़र्च नहीं हो पाया. मध्य प्रदेश एक बड़ा राज्य है और यहाँ पर देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी रहती है. पिछले कुछ महीनों में राज्य सरकार आदिवासी आबादी के विकास पर ताबड़तोड़ घोषणाएँ कर रही है. लेकिन उसका रिकॉर्ड इस मामले में देश में शायद सबसे कमज़ोर है.

प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन पर राज्य सभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पता चला है कि आदिवासी विकास पर ख़र्च के मामले में मध्य प्रदेश एक फिसड्डी राज्य है.

राजस्थान से बीजेपी के राज्य सभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा के सवाल का उत्तर देते हुए आदिवासी मामलों के मंत्रालय ने कुछ आँकड़े पेश किए हैं. इन आँकड़ों से पता चलता है कि साल 2018 से साल 2021 तक मध्य प्रदेश को ट्राइबल सब प्लान के तहत जो धन राशी दी गई, वह पूरी ख़र्च ही नहीं हो पाई है. 

आदिवासी मामलों के मंत्रालय ने संसद में जो आँकड़े पेश किए हैं उसके अनुसार साल 2018-19 के दौरान केन्द्र ने राज्य को ट्राइबल सब प्लान (TSP) के तहत 27474 करोड़ रूपये आवंटित किए थे.

लेकिन मध्य प्रदेश में आदिवासी विकास के लिए आवंटित इस पैसे में से सिर्फ़ 24237 करोड़ रूपये ही ख़र्च किए गये. यानि केन्द्र सरकार ने मध्य प्रदेश में ट्राइबल सब प्लान का जो पैसा दिया उसमें से 3237 करोड़ रूपये ख़र्च ही नहीं किये गए. 

इसी तरह से साल 2019-20 के आँकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि केन्द्र ने पिछले साल राज्य के ख़राब प्रदर्शन के बावजूद मध्य प्रदेश को ट्राइबल सब प्लान में पहले से ज़्यादा पैसा आवंटित किया था.

इस साल यह रक़म बढ़ा कर 33466 रूपये कर दी गई थी. लेकिन आदिवासी विकास के लिए मिला यह पैसा एक बार फिर राज्य में पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया. आँकड़ों की पड़ताल से पता चलता है कि  इस साल हालात और ख़राब हो गए थे. साल 2019-20 में ट्राइबल सब प्लान के पैसे में से 6,486 करोड़ रूपये ख़र्च नहीं हुए. 

यानि मध्य प्रदेश में कुल 33466 करोड़ रूपये में से 26980 करोड़ रूपये ही ख़र्च हुए थे. इस लिहाज़ से देखें तो केन्द्र सरकार ने साल 2019-20 में मध्य प्रदेश को पिछले साल की तुलना में 5992 करोड़ रूपये बढ़ा कर दिए.

लेकिन जब ख़र्च पर निगाह डालते हैं तो पता चलता है कि साल 2018-19 में अगर राज्य में 3237 करोड़ रूपया ख़र्च ही नहीं हो पाया था तो अगले साल पता चलता है कि इसका लगभग दोगुना पैसा ख़र्च नहीं हो पाया.

अब ज़रा 2020-21 के आँकड़े भी देख लिए जाएँ तो स्थिति साफ़ हो सकती है. इस साल केन्द्र सरकार को शायद यह अहसास हो चला था कि मध्य प्रदेश में केन्द्र सरकार के दिए पैसे को ख़र्च करने की क्षमता ही नहीं है.

देश में मध्य प्रदेश में सबसे अधिक आदिवासी आबादी रहती है

इसलिए इस साल आवंटित राशी 24261 करोड़ रूपये कर दी गई. लेकिन मध्य प्रदेश इस बार भी किसी को हैरान नहीं करता है. यह राज्य आदिवासी विकास के मामले में अपनी ही रफ़्तार को क़ायम रखता है और इस घटा दी गई रक़म को भी ख़र्च नहीं कर पाता है.

साल 2020-21 में मध्य प्रदेश में आदिवासी विकास के लिए दिए गए ट्राइबल सब प्लान के तहत 14993 करोड़ रूपये ही ख़र्च होते हैं. यानि इस बार 9268 करोड़ रूपये बिना पड़े रह जाते हैं जो आदिवासी विकास पर ख़र्च करने के लिए दिए गए थे. 

आदिवासी मंत्रालय के अनुसार सरकार ने देश भर में जनजातीय लोगों के कल्याण और विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है. जनजातीय उप योजना यानि TSP जिसे अब STC (Scheduled Tribe Component) कहा जाता है आदिवासी विकास से जुड़ी योजनाओं को समर्पित है.

इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आजीविका, आवास, पेयजल, और स्वच्छता, रोज़गार और कौशल विकास जैसी योजनाएं शामिल हैं.

मध्य प्रदेश एक बड़ा राज्य है और यहाँ पर देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी रहती है. पिछले कुछ महीनों में राज्य सरकार आदिवासी आबादी के विकास पर ताबड़तोड़ घोषणाएँ कर रही है. लेकिन उसका रिकॉर्ड इस मामले में देश में शायद सबसे कमज़ोर है. 

1 COMMENT

  1. Sirji , योजनाओं को पूर्ण करना राज्य सरकार का कर्तव्य है ।
    इसे हम मानव कर रहेंगे , सम्पूर्ण योजनाओं का गतिशील क्रियान्यवन आदिवासी विकास के लिए अतिआवश्यक है ।

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