मध्य प्रदेश: पानी के संरक्षण के लिए सैकड़ों आदिवासियों ने किया हलमा

हलमा आदिवासी किसानों के लिए बेहद मुश्किल परिस्थितियों में अपने आदिवासी भाइयों को आमंत्रित करने की परंपरा है. यह आदिवासी समुदायों की एक सदियों पुरानी परंपरा है जो मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्रों, और राजस्थान के मेवाड़ के कुछ क्षेत्रों के मूल निवासी मानते हैं.

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मध्य प्रदेश के मऊ की पिपलिया पंचायत के दमाली गांव में रविवार को सैकड़ों आदिवासी जमा हुए और हलमा आदिवासी परंपरा में हिस्सा लिया. कुदाल और कुल्हाड़ी का उपयोग करके उन्होंने दमली तालाब के तल पर मिट्टी खोदना शुरू कर दिया, ताकि मॉनसून के दौरान जब बारिश हो तो ज़्यादा से ज़्यादा पानी जमा किया जा सके.

पिपलिया पंचायत के आदिवासी निवासियों को अपने गांव के इतिहास में पहली बार इश साल पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा था. इसके बाद ही हलमा का आह्वान किया गया. इस हलमा कार्यक्रम में भोपाल राजभवन में आदिवासी मामलों की विषय विशेषज्ञ डॉ दीपमाला रावत ने भी हिस्सा लिया.

क्या है हलमा?

हलमा आदिवासी किसानों के लिए बेहद मुश्किल परिस्थितियों में अपने आदिवासी भाइयों को आमंत्रित करने की परंपरा है. यह आदिवासी समुदायों की एक सदियों पुरानी परंपरा है जो मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्रों, और राजस्थान के मेवाड़ के कुछ क्षेत्रों के मूल निवासी मानते हैं.

हलमा की खास बात यह है कि जो लोग अपने आदिवासी भाइयों की मदद करने के लिए उनके निमंत्रण पर आते हैं, वो अपने साथ भोजन और पानी के अलावा जरूरत का दूसरा सामान भी लाते हैं, ताकि प्रभावित किसानों को उनकी मदद के बदले कोई दूसरा खर्च न उठाना पड़े.

पिपलिया ग्राम पंचायत के सचिव विनोद शर्मा ने मीडिया को बताया कि पिछले साल इलाक़े में बहुत कम बारिश हुई थी, जिसकी वजह से तालाब नहीं भरा. इस वजह से गांव में पानी की गंभीर समस्या पैदा हो गई थी. हालात इतने ख़राब हुए कि तालाब दिसंबर में ही सूख गया था.

तालाब के सूखने से लगभग 400 की आबादी वाले गाँव में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया, और वे अपनी दूसरी फसल नहीं लगा सके. गांव के आदिवासी हलमा का आह्वान करने को मजबूर हुए, और रविवार को किए गए काम से यह सुनिश्चित होगा कि इस साल तालाब में ज़्यादा पानी इकट्ठा हो जाए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने के अपने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में भी मध्य प्रदेश की भील आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक ‘हलमा’ परंपरा का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि भील जनजाति द्वारा जल संरक्षण की यह अनोखी परंपरा सराहनीय है. उन्होंने कहा था कि इससे बाकि लोग भी प्रेरित होंगे.

हलमा से ही प्रेरित प्रधानमंत्री मोदी के हर ज़िले में 75 अमृत सरोवर बनाने के सपने को मध्य प्रदेश सरकार ने पूरा करने का वादा किया है, और कहा है कि राज्य में 3800 सरोवर बनाए जाएंगे.

1 COMMENT

  1. सर पहली बार हलमा की जानकारी प्राप्त हुई. मुझे लगता है जल संरक्षण से लेकर और भी कई दूसरे
    व्यापक सामूहिक परिश्रम वाले कार्यक्रमों में हलमा एक बहुत ही उपयोगी और सार्थक पहल होती होगी.

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