ओडिशा: प्राइमरी के बच्चों के लिए किताबें अब 21 आदिवासी भाषाओं में

किताबों में लोकगीत, कला और शिल्प, संगीत, गीत और दंतकथाएं जैसे विषय होंगे, जो आदिवासी समुदायों से क़रीब से जुड़ी हैं. इनमें आदिवासी भाषाओं में पहेलियां और कहानियां भी शामिल होंगी, जिससे इनका दस्तावेज़ीकरण भी हो जाएगा.

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आदिवासियों की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने के इरादे से ओडिशा सरकार ने एक ख़ास पहल की है. इसके तहत प्राइमरी के छात्रों के लिए 21 आदिवासी भाषाओं में किताबें विकसित की जाएंगी.

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (Scheduled Caste/Scheduled Tribe Research and Training Institute – SCSTRTI) आदिवासी भाषा एवं संस्कृति अकादमी (Academy of Tribal Language and Culture – ATLC) के सहयोग से पांचवीं कक्षा तक की इन किताबों को विकसित कर रहा है.

इस किताबों को 2022 शैक्षणिक सत्र से राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति विकास विभाग द्वारा संचालित स्कूलों के सिलेबस में शामिल किया जाएगा.

किताबों में लोकगीत, कला और शिल्प, संगीत, गीत और दंतकथाएं जैसे विषय होंगे, जो आदिवासी समुदायों से क़रीब से जुड़ी हैं. इनमें आदिवासी भाषाओं में पहेलियां और कहानियां भी शामिल होंगी, जिससे इनका दस्तावेज़ीकरण भी हो जाएगा.

एससीएसटीआरटीआई के वरिष्ठ आदिवासी डोमेन विशेषज्ञ प्रेमानंद पटेल ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “छात्रों को उनकी मातृभाषा में शुरुआती शिक्षा देना करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि मूल्यों, परंपराओं, रीति-रिवाज़ों और सांस्कृतिक प्रथाओं को शामिल करना. यह उनकी संस्कृति के संरक्षण और दस्तावेज़ीकरण में मदद करेगा, और बच्चों को पाठों को आसानी से समझने और याद रखने में मदद करेगा.”

किताबों को विकसित करने के लिए कई टीमों ने राज्य के आदिवासी इलाकों का दौरा किया, और वहां के समुदायों की प्रथाओं और जीवन शैली का अध्ययन किया. आदिवासी समुदाय आदिम ज्ञान के स्रोत हैं, जिन्हें संरक्षित किया जाना बेहद ज़रूरी है. साथ ही इस सोच का आने वाली पीढ़ीयों के बीच प्रचार भी अहम है.

मशहूर संथाली लेखक, रिसर्चर और पद्म श्री पुरस्कार विजेता दमयंती बेसरा ने कहा, “एक बार किताबें तैयार हो जाने के बाद, शिक्षकों पर यह ज़िम्मेदारी होगी कि वो बच्चों के बीच इस ज्ञान का प्रचार करें.”

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी भाषाओं में शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने में कई चुनौतियां हैं. इनमें मुख्य है इन भाषाओं को जानने वाले शिक्षकों की कमी है. इसके अलावा, रेज़िडेंशियल स्कूलों में अलग-अलग आदिवासी समुदायों के छात्र होते हैं, और सबके लिए एक ही किताब का इस्तेमाल संभव नहीं है.

इनमें से एक मुश्किल से पार पाने के लिए गैर-आदिवासी शिक्षकों को आदिवासी भाषाओं में बातचीत और पढ़ाने में मदद करने के लिए, SCSTRTI और ATLC ने 21 आदिवासी भाषाओं में वर्कबुक्स, द्विभाषी शब्दकोश और दूसरी सामग्री भी विकसित किए हैं.

किताबों को इस तरह से विकसित किया गया है कि बच्चों का अपनी मातृभाषा से क्षेत्रीय भाषा में ट्रांज़िशन आसान हो सके.

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