कोयलिबेड़ा में स्कूल और शिक्षा के हालात पर उठी आवाज़, 3000 आदिवासी छात्रों का स्कूल छूट चुका है

50 साल की राजस्व मिसल रिकार्ड वंशावली के लिए सरपंच से लेकर पटवारी कलेक्टर,तहसीलदार के चक्कर काटने बावजूद स्थाई प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है. एक सतही सर्वेक्षण के मुताबित सिर्फ कोयलीबेड़ा विकासखंड में ही 3000 से ज्यादा बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है.

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में बाजार स्थल के पास 28 जून को शिक्षा व विभिन्न क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर एक रैली व आम सभा का आयोजन किया गया. 

यह रैली पालक-बालक संघर्ष समिति ने शिक्षा संबंधित समस्याओं को साझा करने के लिए की थी. 

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कोयलीबेड़ा के 18 पंचायतों में शिक्षा क्षेत्रों पर नजर डालें तो लगभग 50000 तक जनसंख्या है. कॉलेज उच्च शिक्षा की ठीक से व्यवस्था नहीं है, हायर सैकंड्री स्कूल 2 है जिसमें एक में भवन नहीं है, एक में भवन अधूरा है. इसके अलावा हाई स्कूल 6 हैं, मिडिल स्कूल 24 हैं, प्राइमरी स्कूल 94 है तो कॉलेज है ही नहीं . 

इस पूरे इलाक़े में लड़कियों के लिए एक ही आश्रम व हॉस्टल है. इसी से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस इलाक़े में लड़कियों के लिए शिक्षा हासिल करना कितना मुश्किल काम है.  

इन हालातों की वजह से आदिवासी बच्चों में शिक्षा की स्थिति काफ़ी ख़राब है.  उस पर कोरोना  की वजह से पिछले लगभग दो साल से स्कूल बंद ही पड़े हैं. शहरी क्षेत्रों में तो ऑनलाइन कक्षाओं का इंतज़ाम है लेकिन आदिवासी इलाक़ों में बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से ठप्प है. ऑनलाईन शिक्षा की वजह से बच्चों की शिक्षा पर ग्रामीण अंचलो क्षेत्र में 

इस इलाक़े में नेटवर्क के अभाव और परिवार की  आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आदिवासी छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई करना नामुमकिन है. 

प्रदर्शनकारियों ने माँग की है कि छात्र छात्राओं के लिए हर आश्रम, छात्रवासों में शिक्षक व शिक्षिका की नियुक्त होना चाहिए. 

इसके अलावा उन्होंने माँग की है कि आदिवासी छात्रों की छात्रावृति में वृद्धि होनी चाहिए. इसके साथ ही प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम में आदिवासी जीवन शैली, सांस्कृतिक, भाषा, लोकगाथाओं को शामिल करने की माँग भी उठाई गई है. 

3000 से ज्यादा बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है

मौजूदा कठिन नियमों के चलते हजारों आदिवासी छात्र एवं छात्राओ को माध्यमिक या उच्चशिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है. इसकी वजह है कि वे जाति व निवास प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पा रहे है. 

50 साल की राजस्व मिसल रिकार्ड वंशावली के लिए सरपंच से लेकर पटवारी कलेक्टर,तहसीलदार के चक्कर काटने बावजूद स्थाई प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है. एक सतही सर्वेक्षण के मुताबित सिर्फ कोयलीबेड़ा विकासखंड में ही 3000 से ज्यादा बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है.

पालक-बालक संघर्ष समिति ब्लॉक कोयलीबेड़ा के सचिव क्षमाराम दुग्गा के नेतृत्व में हुई इस रैली में कोयलीबेड़ा ब्लॉक के स्कूली समस्याओं व शिक्षा के दयनीय हालत को देखते हुए क्षेत्र के गायता संघ अध्यक्ष, पटेल संघ अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि 18 पंचायत, शाला समिति अध्यक्ष, सर्व समाज अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ, किसान संघ अध्यक्ष रैली व आम सभा में शामिल हुए. 

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