जगदलपुर में पहला आदिवासी फूड पार्क, 40 हज़ार आदिवासियों को जोड़ने का सरकारी दावा

ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED) के माध्यम से आदिवासी मंत्रालय की वन धन योजना का जिक्र करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि मेरा वन मेरा धन मेरा उद्यम और सबका साथ सबका विकास सरकार का लक्ष्य है. इसमें गाँवों को जोड़ना होगा.

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केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर भारत को आत्मनिर्भर बनाने के महत्व पर बल दिया. जगदलपुर में पहले ट्राइफूड फूड पार्क के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय आदिवासी मंत्री ने कहा कि भारत को मजबूत बनाने के लिए इसे और अधिक आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है.

अर्जुन मुंडा का दावा है कि जगदलपुर में शुरू हुआ देश का पहला ट्राइफूड पार्क आदिवासियों को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि वन अधिनियम के तहत आदिवासियों को उनकी भूमि, उनके वन उत्पादों पर अधिकार दिया गया है.

ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED) के माध्यम से आदिवासी मंत्रालय की वन धन योजना का जिक्र करते हुए मुंडा ने कहा कि मेरा वन मेरा धन मेरा उद्यम और सबका साथ सबका विकास सरकार का लक्ष्य है. इसमें गाँवों को जोड़ना होगा.

ट्राइफेड गांव की माताओं-बहनों को रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध कराने का काम कर रहा है. देशभर में 40 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं और 40 हजार महिलाएं बस्तर से जुड़ी हैं. जन जंगल जमीन उनका मौलिक अधिकार है.

मधुमक्खी का ख्याल शहद से ज्यादा रखें

केंद्रीय मंत्री ने लघु वन उपज को प्रसंस्करण से बाजार तक ले जाने के लिए ट्राइफेड द्वारा शुरू किए गए ट्राइफूड पार्क के बारे में कहा कि इस भवन का अर्थ तभी है जब इसका पूरा इस्तेमाल हो. हमें इस इमारत का मूल्यांकन इसकी सुंदरता से नहीं बल्कि इसकी उत्पादकता से करना है.

आदिवासियों को बिना किसी नुकसान के रोजगार से जोड़ने और आर्थिक उत्थान के उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने कहा कि हमें शहद से ज्यादा मधुमक्खियों का ख्याल रखना होगा. क्योंकि मधुमक्खियों के बिना शहद का उत्पादन नहीं किया जा सकता है. आदिवासी लोगों को आगे बढ़ाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं.

फूड पार्क में शामिल हुए बस्तर के करीब 40 हजार आदिवासी

इस मौके पर ट्राइफेड के एमडी प्रवीर कृष्णा ने कहा कि दो साल पहले 26 एकड़ की वीरान जमीन थी. जो आज एक फलते-फूलते ट्राइफेड पार्क के रूप में देखा जाता है. इस फूड पार्क से बस्तर के करीब 40,000 आदिवासी जुड़े हुए हैं. इसमें 90 फीसदी महिलाएं हैं.

यह फूड पार्क आने वाले दिनों में लघु वन उपज उद्योग का रूप लेगा. इससे आदिवासियों की आय 10 गुना तक बढ़ सकती है. जगदलपुर में शुरू किया गया ट्राईफूड पार्क देश का पहला ऐसा पार्क है. जिसमें आदिवासियों द्वारा इकट्ठा किए गए वन उपज को बेहतर पैकेजिंग के माध्यम से संसाधित कर बाजार तक पहुंचाया जाएगा.

देश में बनेंगे आठ फूड पार्क

इस फूड पार्क का निर्माण 2 साल पहले अगस्त 2019 में शुरू हुआ था. यह 2 साल में बनकर तैयार हुआ है. ट्राइफेड ने देश में आठ ऐसे फूड पार्क स्थापित करने की योजना बनाई है.

आठ फूड पार्क असम, मणिपुर, उड़ीसा, महाराष्ट्र, नागालैंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित हैं. ट्राई फूड प्रोजेक्ट्स का प्राथमिक उद्देश्य लघु वन उपज को संसाधित करके मूल्य श्रृंखला के साथ सीधे खेत और जंगल से बाजार तक आधुनिक बुनियादी ढांचा और सुविधाएं प्रदान करना है.

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