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छत्तीसगढ़ : धर्म परिवर्तन से नाराज आदिवासियों ने अपने गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर लगाई रोक

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों ने उनके गांवों, जीवन और रिश्तों में सेंध लगा दी और उनकी संस्कृति को प्रदूषित कर दिया, जिससे गांव की मौजूदा शांति और सद्भाव भंग हो गया.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले में धर्मांतरण को लेकर हंगामा हो गया. सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर सड़क पर निकल आए. उन्होंने कहा कि हमारे भाई-बंधु खुद का धर्म छोड़कर ईसाई धर्म को अपना रहे हैं. इससे हमारी संस्कृति खतरे में है. ग्रामीणों ने बाहर से आए लोगों का विरोध शुरू कर दिया.

स्थिति यह है कि रविवार को कौंडेकेरा में धर्मांतरण की बढ़ती संख्या से आक्रोशित ग्रामीण ईसाइयों के प्रार्थना स्थल पर जमा हो गए. तनाव बढ़ने की सूचना मिली थी. लेकिन किसी भी अप्रिय घटना से पहले, एसडीएम की देखरेख में स्थानीय प्रशासन की एक टीम मौके पर पहुंच गई और स्थानीय प्रशासन के समय पर हस्तक्षेप और पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की तैनाती ने उसी दिन तनाव को कम कर दिया.

हालांकि, आक्रोशित ग्रामीणों के मन में अभी भी तनाव भरा हुआ है और अगर स्थिति पूरी तरह से शांत नहीं हुई है, तो आगे के टकराव को टाला नहीं जा सकता है.

दरअसल आदिवासी बहुल राजिम के गांव कौंदकेरा में हर रविवार ईसाई समाज की ओर से प्रार्थना सभा होती है. उसमें बाहरी लोग आते हैं. गांव वाले इसका विरोध कर रहे हैं.

सरपंच गणेश डहरिया और विष्णु निषाद ने शिकायत की कि वे अपने गांव में शत्रुतापूर्ण माहौल महसूस कर रहे हैं. हमारे परिवार के सदस्यों ने अपने धर्मों, रीति-रिवाजों और त्योहारों का अभ्यास करना शुरू कर दिया और रातों-रात सब कुछ बदल गया. हम अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, हमारी एकता टूट गई ऐसी चीजें और बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं.

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों ने उनके गांवों, जीवन और रिश्तों में सेंध लगा दी और उनकी संस्कृति को प्रदूषित कर दिया, जिससे गांव की मौजूदा शांति और सद्भाव भंग हो गया.

नाराज ग्रामीणों ने नए धर्मान्तरित लोगों को अपने पिछले धर्म में लौटने, बाहरी लोगों के साथ संबंध तोड़ने का अल्टीमेटम भी दिया, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. ग्रामीणों द्वारा दिए गए फरमान ने गांव के भीतर परस्पर विरोधी स्थितियां पैदा कर दी हैं.

ग्रामीणों ने कहा कि हमारी संस्कृति को ख़तरा पहुंच रहा है. गांव के लोग अपना धर्म त्याग कर ईसाई धर्म अपना रहे हैं. ग्रामीणों ने ईसाई मिशनरियों को गांव में न घुसने देने की भी बात कही है.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता प्रबल प्रताप सिंह जुदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के संरक्षण में राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले तेज़ हो गए हैं. उन्होंने कहा, “यह एक मूर्खतापूर्ण साजिश का हिस्सा है.”

हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने कहा कि वे स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और गांव में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हर कार्रवाई शुरू की जाएगी.

(प्रतिकात्मक तस्वीर)

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  1. सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ धर्म हिंदू धर्म को तो मान लो

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