ओडिशा: आदिवासी-बहुल नबरंगपुर में कोविड अनाथों के साथ हो रहा अन्याय, बाल विवाह के बढ़ रहे हैं मामले

रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2020 से मई 2021 के बीच नबरंगपुर में प्रशासन द्वारा 131 बाल विवाह रोके गए हैं. इनमें से चार मामले ऐसे थे जिनमें कोविड अनाथों की शादी करवाई जा रही थी.

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कोविड-19 ने वैसे ही देशभर में तबाही मचाई है, लेकिन ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले में महामारी की वजह से अनाथ हुए बच्चों के पुनर्वास की दोहरी चुनौती है. इसके अलावा लड़कियों को बल विवाह से बचाना भी एक मुश्किल काम है.

इस आदिवासी बहुल ज़िले में कई परिवार कोविड-19 की वजह से हुए वित्तीय बोझ से छुटकारा पाने के लिए अपने बच्चों का बाल विवाह करने को मजबूर हो रहे हैं. ऐसे मामलों में पिछले एक साल में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है.

रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2020 से मई 2021 के बीच नबरंगपुर में प्रशासन द्वारा 131 बाल विवाह रोके गए हैं. इनमें से चार मामले ऐसे थे जिनमें कोविड अनाथों की शादी करवाई जा रही थी.

परेशान करने वाली इन घटनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कोविड-19 के आर्थिक परिणामों को माना जा रहा है. ज़्यादातर मामलों में महामारी ने परिवार के एकमात्र कमाने वाले को छीन लिया, जिसके बाद बच्चों की अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया.

जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) सुरेश पटनायक ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले एक साल में 131 बाल विवाह रोके गए हैं. ज़िले के लगभग हर ब्लॉक से बाल विवाह की ख़बरें सामने आ रही हैं. हालात को देखते हुए प्रशासन ने इस कुप्रथा को रोकने के लिए क़दम तेज़ कर दिए हैं.

आधिकारिक रिकॉर्ड कहते हैं कि ज़िला बाल संरक्षण यूनिट द्वारा अप्रैल 2020 और मई 2021 के बीच 54 अनाथों की पहचान की गई. उनमें से 18 कोविड अनाथ हैं, जिनमें दो लड़कियां शामिल हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है.

बाकि 36 बच्चे दूसरे वजहों से अनाथ हुए, और इनमें 21 (16 लड़कियां) ऐसे बच्चें हैं जिन्होंने माता-पिता दोनों को खोया है. 10 लड़कियों सहित बाकी 15 बच्चों के माता-पिता में से एक ज़िंदा हैं.

नबरंगपुर ब्लॉक में 11, नंदाहांडी में चार, तेंतुलीखुंटी में तीन, पापड़ाहांडी में तीन, उमरकोट में सात, रायघर में 12 और झरीगाम और चंदाहांडी में सात-सात अनाथों की पहचान की गई है. 54 अनाथों में से 29 आदिवासी समूहों से हैं, आठ अनुसूचित जाति के और छह अन्य पिछड़े वर्ग के हैं.

ज़िला प्रशासन ने अनाथों की सुरक्षा के लिए 189 पंचायतों में टास्क फोर्स का गठन किया है. अनाथ बच्चों को ज़िला बाल देखभाल केंद्रों और दीन दयाल बालाश्रमों में बसाया गया है.

चाइल्ड केयर से जुड़ी सारी जानकारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है. इसके अलावा, वर और वधू दोनों की स्थिति और उम्र का पता लगाने के लिए पंचायत स्तर पर सभी विवाह पंजीकृत किए जा रहे हैं.

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