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कलेक्टर से बातचीत के बाद नासिक में आदिवासी छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म की, धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा

ज़िला कलेक्टर प्रसाद ने बताया कि आदिवासी विकास मंत्री छात्रों के लगातार संपर्क में हैं और उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए आदिवासी विकास विभाग के साथ बातचीत चल रही है.

महाराष्ट्र के नासिक जिल के ईदगाह मैदान में आदिवासी छात्रों ने ज़िला कलेक्टर आयुष प्रसाद से बातचीत के बाद आखिरकार अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. लेकिन उन्होंने अपना धरना जारी रखने का फ़ैसला किया है.

मुख्यमंत्री ने भी सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए सकारात्मक रवैया अपनाने का भरोसा दिलाया है.

ज़िला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने कहा कि सरकार की मंशा यह है कि छात्र विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई न छोड़ें.

दरअसल, पुणे, नागपुर और नासिक के छात्रों ने सरकारी आदिवासी हॉस्टल के नियमों में बदलाव के विरोध में 13 अगस्त को अपना आंदोलन शुरू किया था.

बाद में उनकी मांगों में हॉस्टल की सुविधाओं और सुरक्षा में सुधार, आदिवासियों के लिए आरक्षण, खाली पदों पर भर्ती, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (PESA) के तहत नियुक्तियां, जाति वैधता प्रमाण पत्र और गढ़चिरौली के एक आश्रम स्कूल में सांप के काटने से मरने वाली तीन आदिवासी लड़कियों के परिवारों को मुआवज़ा देना जैसी बातें शामिल हो गईं.

ज़िला कलेक्टर प्रसाद ने बताया कि आदिवासी विकास मंत्री छात्रों के लगातार संपर्क में हैं और उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए आदिवासी विकास विभाग के साथ बातचीत चल रही है.

उन्होंने कहा, “असल में उठाए गए कई मुद्दों पर पहले ही फ़ैसले लिए जा चुके हैं. सरकार बहुत सकारात्मक रुख अपना रही है और इन सभी मुद्दों को हल करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है.”

प्रसाद ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मुद्दों को हल करने के लिए सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया है, ताकि “यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए स्कूल या कॉलेज न छोड़े.”

अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से मुंबई जाने की अपील की

इससे पहले गुरुवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने और इसके बजाय मुंबई जाकर अपनी लड़ाई लड़ने की अपील की थी.

उन्होंने कहा था कि राज्य की सत्ता के केंद्र तक मार्च करने से ही सरकार उनकी बात सुनने को मजबूर होगी.

आदिवासी आवासीय स्कूलों में खराब हालात के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों से मिलने के बाद दिपके ने कहा कि उनके उठाए गए मुद्दे देश भर में आदिवासी शिक्षा की खराब स्थिति को दर्शाते हैं.

उन्होंने सवाल किया कि सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए PM CARES फंड में जमा पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता.

छात्रों से बातचीत के बाद दिपके ने कहा, “आदिवासी छात्र जिन शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं, वहां हालात बहुत खराब हैं. कई स्कूलों में पीने का पानी, ठीक-ठाक शौचालय, बिस्तर और यहां तक ​​कि बुनियादी शैक्षिक सुविधाएं भी नहीं हैं.”

PM CARES फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “PM CARES के पास लगभग 8,500 करोड़ रुपये जमा हैं. क्या यह पैसा रिटायरमेंट के लिए बचाया जा रहा है? यह रकम देश भर में आदिवासी शिक्षा की किस्मत बदलने के लिए काफी है.”

छात्र ‘सेंट्रल किचन’ योजना का विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि आश्रमशालाओं में बासी खाना सप्लाई किया जा रहा है. वे आदिवासी हॉस्टलों में बेहतर बिस्तर, चालू वॉशरूम, पानी की पर्याप्त सप्लाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.

दिपके ने हैरानी जताई कि कई मंत्री विरोध स्थल पर आए लेकिन मुद्दों को हल नहीं कर पाए. उन्होंने राज्य के नेताओं पर छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया.

उन्होंने कहा, “यहां से उनकी आवाज कभी नहीं सुनी जाएगी. मैंने उन्हें सलाह दी कि वे भूख हड़ताल खत्म करें, आंदोलन जारी रखें और मुंबई तक मार्च करें. वहीं सरकार उनकी बात सुनने को मजबूर होगी.”

आंदोलन को अपने संगठन का समर्थन देते हुए दिपके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी चुनौती दी. उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि ज्यादातर सरकारी स्कूल अच्छी हालत में हैं.

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा था कि 75% सरकारी स्कूल अच्छी हालत में हैं. वे मेरे और मीडिया के साथ विदर्भ के स्कूलों का दौरा करें.”

उन्होंने सरकार को 2014 में सत्ता में आने के बाद से अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जारी करने की चुनौती भी दी.

आदिवासी छात्रों ने आदिवासी हॉस्टलों में रहने वाले और आदिवासी आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले हर छात्र के लिए 10 करोड़ रुपये के बीमा कवर की भी मांग की थी.

मुख्य मांगों में महाराष्ट्र भर में आदिवासी समुदाय के लिए 12,500 पदों पर रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया और अन्य खाली आदिवासी पदों पर भर्ती को तुरंत लागू करना शामिल था.

इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने PESA कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने और उनकी स्थायी नियुक्ति की मांग की, जिन्हें सेवा से हटा दिया गया था.

इससे पहले पुणे में मंजरी आदिवासी हॉस्टल में आदिवासी छात्रों की 17 दिन लंबी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 30 अगस्त को खत्म हुई, जब आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों के बारे में लिखित आश्वासन दिया.

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