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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, 824 सीटें दांव पर, 39 सीटें ST के लिए आरक्षित

भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की.

चुनाव आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए करीब एक महीने तक चलने वाले चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की. इस घोषणा के साथ ही चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है.

पश्चिम बंगाल में चुनाव 2 चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे. असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा. वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा.

चारों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती 4 मई को होगी.

ST आरक्षित सीटें

इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल मिलाकर 824 विधानसभा सीटें हैं.

इसके साथ ही, इन विधानसभाओं में आदिवासियों का प्रतिनिधित्व एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. कुल मिलाकर 824 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित हैं. यानि इन पांचों विधानसभाओं की कुल सीटों में से लगभग 4.73% सीटें ST के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की हैं.

आदिवासी सीटों का बंटवारा बहुत ज़्यादा असमान है. असम और पश्चिम बंगाल को मिलाकर 39 ST सीटों में से 35 सीटें इन्हीं दोनों राज्यों में हैं, जिससे ये दोनों राज्य आदिवासी चुनावी राजनीति का मुख्य केंद्र बन गए हैं.

जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें असम में आदिवासी प्रतिनिधित्व का अनुपात सबसे ज़्यादा है. 126 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, जो विधानसभा की कुल सीटों का 15.08% है.

असम संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन आदेश, 2023 के बाद असम में ST-आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई.

एसटी सीटों पर बीजेपी की इस समय सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी है. उसके पास असम और पश्चिम बंगाल में कुल 13 ST सीटें हैं; वहीं तृणमूल कांग्रेस के पास 9 ST सीटें हैं, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में हैं.

पिछले चुनावों में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश का परिणाम…

पश्चिम बंगाल

294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में और TMC प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही हैं, जबकि BJP उन्हें सत्ता से हटाने की उम्मीद कर रही है.

यहां बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है. इस समय टीएमसी के पास 223 सीटें हैं.

राज्य में साल 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 213 जबकि बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं.

पश्चिम बंगाल में टीएमसी साल 2011 से लगातार सत्ता में है.

इस बार हो रहे विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा सियासी मुक़ाबला इसी राज्य में माना जा रहा है.

तमिलनाडु

तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटें हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन ने 159 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि एआईएडीएमके को 75 सीटों पर जीत मिली थी.

बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की 4 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि कांग्रेस को 18 सीटों पर जीत मिली थी.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में डिलिमिटेशन को एक बड़ा मुद्दा बनाया है और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वो दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताक़त को कम करने की कोशिश कर रही है.

MK स्टालिन सत्ता बरकरार रखने के लिए एक गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं. जबकि AIADMK ने BJP के साथ हाथ मिलाया है. साथ ही सभी की नज़रें नए चुनावी मैदान में उतरे फिल्म स्टार विजय की पार्टी TVK पर भी टिकी हैं.

असम

असम में हिमंत बिस्वा सरमा कुछ कड़े रुख अपनाते हुए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं.

126 सीटों वाली असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 20 मई, 2026 को ख़त्म होने वाला है.

साल 2016 में 60 सीटों पर जीत हासिल कर पहली बार सत्ता में आई बीजेपी ने 2021 में भी एक जैसा ही प्रदर्शन किया था.

बीजेपी ने कुल 93 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 60 सीट पर जीत दर्ज की और उसके नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

असम में बीते कुछ दिनों से अल्पसंख्यकों का मुद्दा काफ़ी सुर्खियों में रहा है. राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कई बार अपने बयानों की वजह से विवादों में भी रहे हैं.

यहां कांग्रेस पार्टी भी सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी है और उसने प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाया है. प्रियंका गांधी ने राज्य का दौरा भी शुरू कर दिया है.

केरल

केरल में विधानसभा की 140 सीटें हैं. साल 2021 में हुए चुनावों में वामपंथी गठबंधन लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने जीत हासलि की थी.

वहीं एलडीएफ़ ने इन चुनावों में 99 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ़ को 41 सीटें मिली थीं.

बीजेपी केरल में भी लगातार पार्टी को मज़बूत करने में लगी है. इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए भी राज्य में काफ़ी अहम माना जा रहा है.

राज्य में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 115 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. हालांकि उसे किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी और पार्टी के 84 उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी.

केरल में कांग्रेस, लेफ्ट को हटाकर सत्ता में आने की उम्मीद कर रही है.

पुडुचेरी

पुडुचेरी में विधानसभा की कुल 30 सीटें हैं.

साल 2021 में इस केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि एआईएनआरसी को दस और डीएमके को छह सीटों पर जीत मिली थी.

पुडुचेरी में सत्ताधारी AINRC-BJP गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहा है.

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