HomeTribal Kitchenमध्यप्रदेश का कड़कनाथ और एक दिल छूने वाली कहानी

मध्यप्रदेश का कड़कनाथ और एक दिल छूने वाली कहानी

अलिराजपुर में कड़कनाथ पकाने वाले कैमता दादा अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन उनकी याद सदा हमारे मन में रहेगी.

अप्रैल महीने में हम एकबार फिर मध्यप्रदेश के अलिराजपुर ज़िले में थे. यह ज़िला मध्यप्रदेश में आदिवासी संस्कृति को बचाए रखने के लिए जाना जाता है.

वैसे इस जिले की एक और पहचान यह भी है कि देश के सबसे ग़रीब ज़िलों में इसका नाम शामिल है.

यहां मैं भी भारत के चाहने वालों की कमी नहीं है. यहां पहुंचे तो कई जगह से खाने के न्यौते मिलते चले गए. हमारे लिए खाने के सभी न्यौते स्वीकार करना संभव नहीं था.

लेकिन एक न्यौते पर गए तो कुछ ऐसा हुआ जिसकी मीठी सी याद हम जीवन भर के लिए समेट कर दिल्ली लौटे थे.

दरअसल इस न्यौते पर अलिराजपुर में कैमता दादा नाम के व्यक्ति ने हमारे लिए बड़े प्रेम से कड़कनाथ पकाया था. वे चुपचाप खाना पकाए जा रहे थे, उनके साथ मौजूद एक लड़के से हम लोग लगातार बातचीत कर रहे थे.

इस बातचीत के दौरान हल्के से कैमता दादा ने धीरे से कहा कि वे मुझे पहचानते हैं और मेरे लिए पहले भी खाना पका चुके हैं. लेकिन मुझे उनका चेहरा याद नहीं आ रहा था.

उसके बाद उन्होंने मुझे याद दिलाया कि उन्होंने उस समय के अलिराजपुर विधायक मुकेश पटेल के घर पर हमारे लिए मुर्गा पकाया था.

तब मुझे याद आया कि उन्होंने उस समय भी हमारे लिए कड़कनाथ मुर्गा और मक्के की रोटी बनाई थी. लेकिन उस समय मेरी आंखें नम हो गईं जब उन्होने बताया कि उनके घर में शादी थी और आज ही सुबह उनकी भतीज़ी की विदाई हुई थी. सुबह उनकी भतीजी की विदाई हुई थी और दोपहर को वो हमारे लिए खाना बना रहे थे.

उन्होने बड़े प्रेम से हमें महुआ पिलाई और खाना खिलाया, हमने उनसे विदा ली और दिल्ली लौट आए. इस शूट का वीडियो तैयार हुआ तो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया.

जिस दिन वीडियो अपलोड हुआ, एक दर्शक ने अलिराजपुर से कॉमेंट किया कि 10 मई 2026 को करंट लगने से उनकी मौत हो गई है.

इस ख़बर ने हमारी टीम का दिल तोड़ दिया. मैं भी भारत की पूरी टीम की तरफ से कैमता दादा को श्रद्धांजलि !

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