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त्रिपुरा : आदिवासी त्योहारों को देखते हुए TTAADC चुनाव अब 12 अप्रैल को होगा

राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान की तारीख को एक दिन पहले करने का फ़ैसला सभी ज़रूरी बातों पर विचार करने के बाद लिया गया. खासकर सभी समुदायों के ज़्यादा से ज़्यादा मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की ज़रूरत को देखते हुए.

त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने मंगलवार को जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद (Tribal Areas Autonomous District Council) चुनावों के लिए 13 अप्रैल को मतदान की घोषणा की थी. लेकिन अब आयोग ने आदिवासी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए TTAADC के चुनाव की तारीख एक दिन पहले करते हुए 12 अप्रैल 2026 तय कर दी है.

आयोग ने बुधवार को जारी अधिसूचना में बताया कि पहले मतदान 13 अप्रैल को होना था, लेकिन विभिन्न समुदायों के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की थी.

दरअसल, 13 अप्रैल से प्रमुख आदिवासी त्योहार जैसे गरिया पूजा, बिज़ू और बुइसु शुरू होते हैं, जो चुनाव वाले क्षेत्रों में बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं. इसे देखते हुए आयोग ने ज्यादा से ज्यादा मतदान सुनिश्चित करने के लिए तारीख बदलने का फैसला लिया.

एसईसी सचिव अनुराग सेन ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और चुनाव 12 अप्रैल को कराने का प्रस्ताव रखा गया था. सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आयोग ने नई तारीख तय की, जबकि अन्य सभी कार्यक्रम पहले जैसे ही रहेंगे.

राज्य चुनाव आयुक्त मनोज कुमार के मुताबिक, नामांकन की अंतिम तिथि 25 मार्च है, जबकि 26 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी. 28 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे और मतगणना 17 अप्रैल को होगी.

चुनाव आयोग के अनुसार इस बार परिषद चुनाव में कुल 9 लाख 62 हजार 697 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. मतदान सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा.

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में आवश्यकता महसूस होती है तो 16 अप्रैल को पुनर्मतदान भी कराया जा सकता है.

टीटीएएडीसी चुनाव को त्रिपुरा की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यह परिषद राज्य के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन और विकास से सीधे जुड़ी हुई है.

साल 2021 में हुए पिछले चुनाव में टिपरा मोथा पार्टी (Tipra Motha) ने शानदार जीत दर्ज करते हुए परिषद की सत्ता अपने हाथ में ली थी. इस पार्टी का नेतृत्व प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा (Pradyot Bikram Manikya Deb Barma) कर रहे हैं, जो आदिवासी अधिकारों और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं.

2021 के चुनाव में TMP ने 18 सीटें जीतकर वाम मोर्चा से सत्ता छीनी थी, जबकि भाजपा ने 11 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

इस बार के चुनाव में भी टिपरा मोथा अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है. वहीं विपक्षी दल भी इसे चुनौती देने के लिए सक्रिय हो चुके हैं.

30 सदस्यीय टीटीएएडीसी में 28 सदस्य चुने जाते हैं, जबकि 2 सदस्यों को राज्य सरकार नामित करती है.

23 अगस्त 1984 को स्थापित इस परिषद का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा, कल्याण और विकास सुनिश्चित करना है. 1985 में इसके लिए पहली बार चुनाव कराए गए थे, जो आदिवासी स्वशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जाता है.

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