महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोग ‘आदिवासी विकास आयुक्त कार्यालय’ के बाहर जमा हैं. वे हॉस्टल में एडमिशन के लिए तय नई उम्र सीमा को हटाने और आश्रमशाला के छात्रों के लिए इंश्योरेंस कवर को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं.
यह विरोध प्रदर्शन 5 अगस्त के उस सरकारी आदेश के खिलाफ है, जिसमें हॉस्टल में एडमिशन के लिए अधिकतम उम्र सीमा 26 साल तय की गई थी और उन छात्रों को दोबारा हॉस्टल में रहने से रोक दिया गया था जिन्होंने पहले ही पोस्ट-मैट्रिक प्रोफेशनल डिग्री पूरी कर ली है.
इस पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए आंदोलन के नेता और वकील सुभाष गावित ने कहा कि जब छात्र दूसरे कोर्स की पढ़ाई के लिए दूसरी स्कॉलरशिप पाने के हकदार हैं तो उन्हें हॉस्टल में भी एडमिशन मिलना चाहिए.
उन्होंने पूछा, “अगर छात्र आगे की पढ़ाई के लिए दूसरी स्कॉलरशिप पा सकते हैं, तो उन्हें दूसरी बार हॉस्टल में एडमिशन क्यों नहीं मिलना चाहिए?”
छात्रों ने उम्र सीमा तय करने का भी विरोध किया.
छात्र सागर पावरा ने कहा, “कई आदिवासी छात्रों का समय खराब शिक्षा सुविधाओं या कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी में निकल जाता है. वे ज़्यादा उम्र में भी MPSC और UPSC की परीक्षा दे सकते हैं, तो फिर हॉस्टल के लिए 26 साल की उम्र सीमा कैसे सही हो सकती है?”
प्रदर्शनकारियों ने आश्रमशालाओं के छात्रों के लिए ज़्यादा इंश्योरेंस मुआवज़े की भी मांग की है.
गावित ने कहा, “आज भी फूड पॉइज़निंग या सांप के काटने जैसी घटनाओं से छात्रों की मौत हो जाती है. परिवारों को इंश्योरेंस के तौर पर सिर्फ़ 1 लाख रुपये मिलते हैं. हम चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाए.”
उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
विरोध प्रदर्शन के अगले दिन भी जारी रहने के कारण पुलिस ने कमिश्नरेट के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है और ट्रैफिक डायवर्जन लागू है.
पुणे में भी प्रदर्शन
पुणे ज़िले के मंजरी इलाके में सरकारी आदिवासी हॉस्टल में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुक्रवार (21 अगस्त, 2026) को नौवें दिन भी जारी रही, जिसके चलते दो आदिवासी छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान खींचने के लिए अभी भी पांच छात्र भूख हड़ताल पर हैं.
प्रदर्शनकारी नवनाथ मोरे ने बताया कि 22 वर्षीय विजय भांडले और 24 वर्षीय राहुल धनवे को सांस लेने में तकलीफ़ और डिहाइड्रेशन की वजह से ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया और अभी उनका इलाज चल रहा है.
यहां के छात्र भी 5 अगस्त को जारी सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिसमें उम्र की सीमा और पढ़ाई में गैप (ब्रेक) से जुड़ी शर्तें लगाई गई हैं, जिन्हें वे अनुचित मानते हैं.
छात्र उस नियम का विरोध कर रहे हैं जो हॉस्टल में रहने वालों को नौकरी करने से रोकता है.
प्रदर्शन के नेता शरद थोकल ने कहा, “छात्रों को पार्ट-टाइम काम करने से क्यों रोका जाए? कुछ छात्रों के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना ज़रूरी है. ये छात्र 18 साल से ज़्यादा उम्र के हैं.”
छात्रों ने अपनी कई मांगे सरकार के सामने रखी हैं. जिसमें से मुख्य मांगें – हॉस्टल की 70 प्रतिशत सीटें उसी ज़िले के छात्रों के लिए आरक्षित करने वाली गाइडलाइन को रद्द करने, गढ़चिरौली के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में साँप के काटने से मरीं तीन लड़कियों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने और इन मौतों के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ गैर-इरादतन हत्या का आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है.
उन्होंने 12,500 आदिवासी पदों पर भर्ती शुरू करने और नौकरी से हटाए गए PESA कर्मचारियों को बहाल करने व उनकी स्थायी नियुक्ति की भी मांग की है.

