ओडिशा सरकार, नोटिफ़ाइड प्रतिबंधित गांवों में रहने वाले ‘खास तौर पर कमज़ोर आदिवासी समूहों’ (PVTGs) और दूसरे आदिवासी समुदायों के इलाकों में विदेशी पर्यटकों और शोधकर्ताओं के आने पर लगी पाबंदियों में कुछ ढील देने पर विचार कर रही है.
पर्यटन विभाग ने ‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग’ से इस कदम के संभावित सांस्कृतिक और सामाजिक असर का आकलन करने को कहा है.
साथ ही विभाग से उन सुरक्षा उपायों या शर्तों का सुझाव देने को भी कहा गया है जो इन इलाकों को विदेशी पर्यटकों के लिए खोलने पर ज़रूरी हो सकती हैं.
‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग’ को भेजे एक संदेश में पर्यटन विभाग ने PVTG इलाकों में विदेशी पर्यटकों और शोधकर्ताओं के आने-जाने से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने और उनमें बदलाव करने का प्रस्ताव दिया.
ये पाबंदियां पर्यटन विभाग द्वारा 2 मार्च, 2007 को जारी एक नोटिफ़िकेशन के ज़रिए लगाई गई थीं. इसमें कालाहांडी, रायगडा, नुआपाडा, कंधमाल, मलकानगिरी और कोरापुट जैसे आदिवासी-बहुल ज़िलों के कुछ खास गांवों को शामिल किया गया था.
इस मुद्दे पर हाल ही में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई.
बैठक में कुछ प्रतिबंधित इलाकों में सुरक्षा की बेहतर स्थिति और पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं पर ध्यान दिया गया, साथ ही वैधानिक समिति की राय लेने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया.
हालांकि, बैठक में यह तय किया गया कि विदेशी पर्यटकों के लिए केवल पर्यटन की संभावना वाले चुनिंदा गांवों को खोलने पर ही विचार किया जा सकता है.
पर्यटन विभाग को ऐसे गांवों और जगहों की पहचान करने और वहां पर्यटन की संभावनाओं का आकलन करने का निर्देश दिया गया.
विभाग से यह भी कहा गया है कि वह सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर DG (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) की राय ले और PVTGs तथा अन्य आदिवासी समुदायों पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में ‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग’ से आकलन प्राप्त करे.
सांस्कृतिक और सामाजिक आकलन में पारंपरिक जीवन-शैली, रीति-रिवाजों और सामाजिक प्रथाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जांच करने और उचित सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने की उम्मीद है.
आखिरकार इस मामले को सरकार द्वारा गठित वैधानिक समिति के सामने रखा जाएगा. यह समिति पर्यटन विभाग, राज्य पुलिस की इंटेलिजेंस विंग और ‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग’ से मिली जानकारी पर विचार करने के बाद अंतिम फ़ैसला लेगी.
बताया जाता है कि शर्मा ने पर्यटन विभाग को कोरापुट ज़िले के एक नोटिफ़ाइड गांव में राज्य की आदिवासी विरासत को दिखाने वाले सांस्कृतिक उत्सव के आयोजन की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है.
‘अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग’ से 20 सितंबर तक अपना आकलन देने को कहा गया है, जिसके बाद पर्यटन विभाग द्वारा वैधानिक समिति के सामने प्रस्ताव पेश किए जाने की उम्मीद है.
राज्य में 13 मान्यता प्राप्त PVTG (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) हैं, जिन्हें पहले आदिम जनजातियां कहा जाता था; इनमें बोंडा, डोंगरिया कोंध, कुटिया कोंध, जुआंग और अन्य शामिल हैं.

