मध्य प्रदेश के बैगा आदिवासी को पीवीटीजी (PVTG) यानि विशेष रुप संरक्षित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है. इस बात से ही समझा जा सकता है कि यह वह आदिवासी समुदाय है जो अभी काफ़ी हद तक अलग-थलग जीवन बिताते हैं.
राज्य के बालाघाट ज़िले के पहाड़ी और घने जंगल के इलाकें में बसे बैगा आदिवासी फ़िलहाल एक बड़ी आफ़त के शिकार हो गए हैं. यहां 20 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो गई है.
बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के सिलसिले में आई ख़बरों को पहले तो सरकार ने नज़रअंदाज़ किया. लेकिन जब मीडिया के ज़रिए यह ख़बर फैलने लगी तो प्रशासन हरकत में आया.
लेकिन ज़िला प्रशासन की मंशा बैगा बच्चों की मौत के मामले को दबाने की ज़्यादा नज़र आ रही थी. लेकिन मीडिया रिपोर्टों के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और बैहर विधानसभा सीट से विधायक संजय उइके ने इस मुद्दे को लगातार उठाया.
इसके बात सरकार पर दबाव बना और अंततः मुख्यमंत्री मोहन यादव को यह स्वीकार करना पड़ा की बैगा आदिवासी बच्चों की संख्या 20 से ज़्यादा है.
इसके अलावा मीडिया और विपक्ष के दबाव के बाद कम से कम सरकार को मुआवजा राशी 20 हजा़र से बढ़ा कर दो लाख रुपए करनी पड़ी.
मैं भी भारत की इस ख़ास ग्राउंड रिपोर्ट में हमने कोशिश की है कि बैगा बच्चों की मौत का असली कारण क्या है?

