आदिवासी अधिकारों के लिए होने वाली रैली को नहीं मिली अनुमति, पुलिस ने दिया कानून व्यवस्था का हवाला

रैली के लिए गुजरात के अलग अलग जिलों के आदिवासी समुदायों के 10,000 से ज्यादा लोगों ने अहमदाबाद आना था.

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गुजरात के एक आदिवासी अधिकार संगठन, एकलव्य संगठन ने कहा है कि अहमदाबाद पुलिस ने उन्हें शहर में एक आदिवासी रैली और साबरमती रिवरफ्रंट पर एक सम्मेलन आयोजित करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया.

एकलव्य संगठन की पॉलोमी मिस्त्री ने मीडिया को बताया कि उनके संगठन ने रैली का आयोजन आदिवासी समुदायों के लिए वन अधिकार अधिनियम, मनरेगा और खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की मांग करने के लिए किया था.

रैली के लिए गुजरात के अलग अलग जिलों के आदिवासी समुदायों के 10,000 से ज्यादा लोगों ने अहमदाबाद आना था. लेकिन रैली आयोजित करने के लिए संगठन को बुधवार को अनुमति देने से इनकार कर दिया गया.

संगठन ने एक बयान जारी कर कहा, “गुजरात सरकार और पुलिस हमारे साथ अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से पेश आई है.”

अनुमति न मिलने के पीछे की वजह के बारे में मिस्त्री ने कहा, “बुधवार को, पुलिस ने हमें लिखित रूप में बताया कि बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से कानून-व्यवस्था के बाधित होने की संभावना है. इसलिए रैली के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती.”

साबरमती रिवरफ्रंट ईस्ट पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक वीडी जाला ने कहा, “पुलिस आयुक्त कार्यालय ने रैली के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है.”

आपको याद होगा कि गुजरात में इस वक्त चुनावी रैलियों का मौसम है. पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल तक की रैलियां हुई हैं. अगले हफ्ते कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी एक रैली को संबोधित करेंगे.

इस साल के अंत में राज्य में होने वाले चुनावों के मद्देनजर यह रैलियां राजनीतिक पार्टियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. लेकिन इस तरह के आयोजन की अहमियत एकलव्य संगठन जैसे समूहों के लिए भी है, क्योंकि वो समाज के एक बड़े तबके के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं.

आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ने वालों के लिए इस तरह की अड़चनें खड़ी करना क्या सही है? वो भी तब जब नेताओं को रैलियां करने की खुली छूट है.

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