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सीमा पर गोलीबारी के बाद असम के आदिवासी संगठन ने अरुणाचल के खिलाफ ‘आर्थिक नाकेबंदी’ लागू की

गोलीबारी की वह घटना, जिसके कारण नाकेबंदी शुरू हुई, सोमवार (11 अगस्त) को मिंगमांग बस्ती में हुई थी. बताया जाता है कि यह घटना अरुणाचल प्रदेश द्वारा असम की ज़मीन पर कथित कब्ज़े को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी.

असम के एक आदिवासी संगठन ने बुधवार से अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ अनिश्चितकालीन “आर्थिक नाकेबंदी” लागू कर दी. यह कदम सीमा पर हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना के विरोध में उठाया गया है, जिसमें 11 लोग घायल हो गए थे.

असम के ‘मिसिंग’ आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘ताकम मिसिंग पोरिन केबांग’ (TMPK) और कुछ अन्य संगठनों ने मिलकर बुधवार को राज्य के धेमाजी जिले में 12 घंटे के बंद का भी आह्वान किया.

वहीं गुरुवार (13 अगस्त) को धेमाजी ज़िले के लिकाबली एंट्री पॉइंट पर असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रदर्शनकारियों के बीच फिर से झड़पें हुईं.

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश पुलिस को गुस्साई भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलानी पड़ीं.

क्या है पूरा मामला?

असम में मिसिंग जनजाति के मुख्य छात्र संगठन, TMPK ने बुधवार (12 अगस्त) को सीमा पर हुई गोलीबारी की घटना के जवाब में अपनी अनिश्चितकालीन नाकेबंदी शुरू की थी. इस घटना में असम के कम से कम 11 मूल निवासी घायल हो गए थे.

इसके परिणामस्वरूप, प्रदर्शनकारियों ने दोनों पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाली कई सड़कों को ब्लॉक कर दिया. जिनमें द्वारमुख-बांदरदेवा रूट, धेमाजी में रुक्सिन, लखीमपुर में बांदरदेवा, गोहपुर में सोलेंगी और विश्वनाथ में पाभोई शामिल हैं.

वे अरुणाचल प्रदेश में आने-जाने वाले सभी वाहनों की आवाजाही रोक रहे थे, सिवाय उन वाहनों के जो आपातकालीन सेवाओं या स्कूल ट्रांसपोर्ट से जुड़े थे.

असम के एक सरकारी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि झड़प तब शुरू हुई जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ लोगों ने कथित तौर पर असमिया प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया.

अधिकारी ने कहा, “फिर हमने देखा कि अरुणाचल की पुलिस ने अपनी तरफ़ की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में तीन राउंड गोलियां चलाईं.”

गोलीबारी की वह घटना, जिसके कारण नाकेबंदी शुरू हुई, सोमवार (11 अगस्त) को मिंगमांग बस्ती में हुई थी. बताया जाता है कि यह घटना अरुणाचल प्रदेश द्वारा असम की ज़मीन पर कथित कब्ज़े को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी.

TMPK और मिसिंग मिमाग केबांग’ (MMK) ने अंतर-राज्यीय सीमा के पास हुई गोलीबारी की घटना में कथित तौर पर शामिल अरुणाचल प्रदेश के लोगों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.

साथ ही असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद का जल्द समाधान और अरुणाचल प्रदेश द्वारा असम की ज़मीन पर कथित कब्ज़े को पूरी तरह रोकने की मांग की है.

TMPK के सचिव सान पैंगिंग ने कहा कि जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिल जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

पैंगिंग ने कहा, “अंतर-राज्यीय सीमा पर ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं लेकिन हमारी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है.”

यह घटना तब हुई जब असम के कुछ लोग अरुणाचल के ग्रामीणों के साथ गाँव की सीमा से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए बैठक करने वहां गए थे. असम में विरोध कर रहे संगठनों ने इस घटना के लिए अरुणाचल को ज़िम्मेदार ठहराया.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम वहां शांतिपूर्ण बातचीत के लिए गए थे, लेकिन हम पर गोलीबारी की गई. एक महीने में यह ऐसी तीसरी घटना है. हम अरुणाचल सरकार से अपील करते हैं कि इसमें शामिल सभी लोगों को गिरफ़्तार किया जाए, वरना हम अपना विरोध अनिश्चित काल तक जारी रखेंगे.”

एक और प्रदर्शनकारी ने अरुणाचल सरकार द्वारा सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को जारी किए गए बंदूक के लाइसेंस रद्द करने की मांग की.

उन्होंने कहा, “अगर लाइसेंस रद्द नहीं किए जाते हैं, तो असम सरकार को राज्य के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को हथियार देने चाहिए.”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को मीडिया से कहा कि उन्होंने अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.

उन्होंने कहा, “मैंने अरुणाचल के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे इस घटना की जांच के आदेश दें ताकि दोषियों का पता लगाकर उन्हें सज़ा दी जा सके.”

दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है. सरमा ने कहा कि ज़्यादातर इलाकों में यह विवाद सुलझा लिया गया है.

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह विवाद 12 इलाकों के 123 गांवों से जुड़ा था. इनमें से 7 इलाकों के 71 गांवों में मामला सुलझा लिया गया है. अब 5 इलाकों के 52 गांवों में इस समस्या को सुलझाना बाकी है. सोमवार को जिस जगह घटना हुई, वह भी इन्हीं 52 गांवों में से एक है.”

उन्होंने आगे कहा कि दोनों राज्यों में चुनाव होने के कारण असम और अरुणाचल की सीमावर्ती क्षेत्रीय समितियां पिछले डेढ़ साल से काम नहीं कर पा रही थीं. उन्हें भरोसा था कि बाकी इलाकों में भी विवाद को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.

असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा काफी लंबी है, जो असम के आठ और अरुणाचल प्रदेश के 12 ज़िलों से होकर गुज़रती है.

29 जुलाई को असम सरकार ने राज्य विधानसभा को बताया कि अरुणाचल प्रदेश ने कथित तौर पर राज्य की 16,144.01 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है. इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों की ओर से 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई गई हैं, जो इस दिशा में प्रयास कर रही हैं.

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