ओडिशा के गजपति ज़िले के आर उदयगिरि इलाके में रविवार रात गंजाम के एक 41 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया. उस पर करीब 300 किसानों के साथ 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी करने का आरोप है.
आरोपी की पहचान ओडिशा के गंजाम ज़िले के खल्लीकोट इलाके के संजीव पटनायक के तौर पर हुई है.
उस पर गजपति जिले के मोहना, नुआगाडा और आर उदयगिरि के किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है.
‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उसने आदिवासी और दलित परिवारों को निशाना बनाया और उन्हें सब्सिडी वाली दरों पर खेती के लिए बोरवेल खुदवाने का वादा किया.
न्यायिक कार्रवाई और पुलिस जांच
गिरफ़्तारी के बाद, पटनायक को आर उदयगिरि में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) के सामने पेश किया गया. अदालत ने उसे आठ दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
आर उदयगिरि के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) राकेश कुमार साहू ने सोमवार को बताया कि रविवार को जब कई किसानों ने उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं, तो आर उदयगिरि पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और संगठित अपराध का मामला दर्ज किया गया.
उन्होंने कहा कि पुलिस इस घोटाले से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है.
घोटाला कैसे हुआ
शुरुआती जांच से पता चला कि धोखाधड़ी 2024 में शुरू हुई, जब कुछ लोगों का एक समूह नुआगाडा, मोहना और आर उदयगिरि ब्लॉक के गांवों में गया.
उन्होंने दावा किया था कि वे भुवनेश्वर स्थित एक एजुकेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी के CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) प्रोजेक्ट से जुड़े हैं.
उन्होंने किसानों (जिनमें ज़्यादातर आदिवासी और दलित थे) को कम कीमत वाले बोरवेल लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करने का लालच दिया और हर किसान से रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 11,000 रुपये लिए.
पटनायक ने किसानों को यह भी भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस स्कीम के तहत इतनी ही रकम देगी.
उसकी बातों पर भरोसा करके, जिले के कई किसानों ने स्कीम में रजिस्ट्रेशन कराया और पैसे जमा कर दिए.
हालांकि, दो साल से ज़्यादा समय बीतने के बाद भी कोई बोरवेल नहीं खोदा गया और न ही कोई वादा किया गया फायदा मिला. इसके बाद, नाराज़ किसानों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया.
उन्होंने कहा कि जांच का मकसद इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य आरोपियों और मामले के कुछ अन्य पहलुओं का पता लगाना है. उन्होंने कहा कि हमें शक है कि इस मामले में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं.
शुरुआती जांच से यह भी पता चला है कि आरोपी के खिलाफ जिले के रामागिरी पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का एक मामला पहले से ही लंबित है.

