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आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की पुलिस हिरासत में मौत का मामला विधानसभा में गूंजा

आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत पर सरकार ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि उन्हें उचित इलाज उपलब्ध कराया गया था. जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने एक फ़र्ज़ी मामले में ठाकुर को जेल में डाल दिया था.

छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की पुलिस हिरासत में मौत का मामला विधानसभा में मुद्दा बना है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले एक साल (2025) में छत्तीसगढ़ की जेलों में हुई कैदियों की मौत पर सवाल पूछा था.

इस सवाल के जवाब में सरकार की तरफ़ से गृहमंत्री विजय शर्मा ने उत्तर में बताया कि जनवरी 2025 से लेकर दिसबंर 2026 के दौरान राज्य की जेलों में बंद 66 क़ैदियों की मौत हो गई.

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की पुलिस हिरासत में मौत का कारण पूछा. इसके जवाब में सरकार ने कहा कि जीवन ठाकुर शुरू में कांकेर ज़िला जेल में बंद थे.

उसके बाद उन्हें अदालत के आदेश पर राज्य की राजधानी रायपुर की जेल में भेज दिया गया था. गृहमंत्री ने यह भी बताया कि जीवन ठाकुर की तबीयत ख़राब होने पर रायपुर जि़ला अस्पताल में भर्ती किया गया था. 

जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उनको राज्य सरकार के बीआर अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में दाखिल कराया गया.

भूपेश बघेल ने सरकार से जेल में बेद क़ैदियों की मौत की न्यायिक जांच पूरी होने पर भी सवाल पूछा. इस पर सरकारने बताया कि अभी तक सिर्फ़ 18 मौतों की मजिस्ट्रेट जांच पूरी हुई है.

सरकार के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं था. भूपेश बघेल ने सरकार पर आरोप लगाया कि आदिवासी नेता जीवन ठाकुर डायबिटीज़ के मरीज़ थे. जेल में उन्हें समय पर दवाई नहीं मिली जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई. 

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जीवन ठाकुर को फ़र्जी मामला बना कर जेल में डाला था.

जीवन ठाकुर कौन थे

छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का केंद्र बने आदिवासी नेता जीवन ठाकुर स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे. वे विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के किसानों, युवाओं और आम लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे. 

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जीवन ठाकुर को एक मामले में गिरफ्तार कर पहले कांकेर जिले की जेल में रखा गया था और बाद में अदालत के आदेश पर उन्हें रायपुर जेल स्थानांतरित किया गया. 

न्यायिक हिरासत के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 दिसंबर 2025 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

इस घटना को लेकर विपक्ष ने हिरासत में लापरवाही और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि उनकी मृत्यु बीमारी के कारण हुई और मामले की जांच जारी है.

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