kerala-tribal-families-malappuram-water-shortage-relocation-adivasi-crisisकेरल के मलप्पुरम जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है. जहां भीषण जल संकट के कारण कई आदिवासी परिवारों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाके में लंबे समय से पीने के पानी की भारी कमी बनी हुई है. प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं और सरकारी स्तर पर पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
इन परिस्थितियों में, आदिवासी समुदाय के कई परिवारों ने अपने गांवों को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में अस्थायी रूप से बसने का फैसला किया है. उनका कहना है कि पानी की कमी के कारण न सिर्फ पीने के पानी का संकट खड़ा हुआ है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा है.
महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. जिससे उनकी सेहत और सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है.
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की कोशिश शुरू की है. हालांकि, आदिवासी परिवारों का कहना है कि यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और उन्हें स्थायी समाधान की जरूरत है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और जल प्रबंधन की कमी इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं.
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि देश के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अभी भी कितनी कमजोर है. “मेन भी भारत” लगातार ऐसे मुद्दों को उठाता रहा है और इस मामले में भी प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग करता है.
मलप्पुरम में मामला संवेदनशील क्यों
मलप्पुरम जिले में कई महत्वपूर्ण जनजातीय समुदाय रहते हैं. इनमें प्रमुख रूप से पनियन (Paniyan), कट्टुनायकन (Kattunaikan), चोलानायकन (Cholanaikkan), अरनादन (Aranadan) और कुरुमन (Kuruman) जैसे समुदाय शामिल हैं.
इनमें से चोलानायकन और कट्टुनायकन समुदाय को अत्यंत संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) माना जाता है, जो आज भी जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं.
यानि ये ऐसे आदिवासी समुदाय हैं जिनकी जनसंख्या में कमी या ठहराव एक चिंता का विषय है.
जनसंख्या के आंकड़ों की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार मलप्पुरम जिले में अनुसूचित जनजातियों की कुल आबादी लगभग 22,990 के आसपास है.
ये समुदाय मुख्य रूप से नीलांबुर और एरनाड के जंगल और पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं, जहां आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जाती है.
ऐसे में पानी की किल्लत के कारण हो रहा यह पलायन सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि इन आदिवासी समुदायों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं की एक बड़ी तस्वीर को सामने लाता है.

