ट्राइबल म्यूज़ियम बनाने की कवायद तेज़

संग्रहालयों के निर्माण में आदिवासी समुदायों और उनकी कला को शामिल करने पर ज़ोर होगा. केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों से संपर्क किया है.

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आदिवासी समुदायों तक अपनी पहुंच को बढ़ाने की कोशिशों के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संग्रहालयों को बनाने की संभावना तलाशने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों से संपर्क किया है.

आदिवासी मामलों का मंत्रालय आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलनों के साथ-साथ आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के एक संग्रह पर भी काम कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानि गुरुवार को इन संग्रहालयों की प्रगति की समीक्षा करेंगे.

फ़िलहाल केंद्र सरकार ने ऐसे 10 संग्रहालयों को मंजूरी दी है. प्रधान मंत्री और गृह मंत्री ने उनमें से दो का उद्घाटन भी कर दिया है – एक झारखंड के रांची में और दूसरा मणिपुर के तामेंगलोंग में.

इसके अलावा, केल्शी (मिजोरम), रायपुर (छत्तीसगढ़), राजपिपला (गुजरात), छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश), लंबासिंगी (आंध्र प्रदेश), कोझीकोड (केरल), पोंडा (गोवा) और हैदराबाद (तेलंगाना) में संग्रहालय बन रहे हैं.

मीडिया से बात करते हुए, केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार बहादुर आदिवासी नायकों के एक बड़े वर्ग के योगदान को उजागर करना चाहती है, जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन फिर भी वो अनसुना ही रहे.

“मंत्रालय ने इन बहादुर योद्धाओं के योगदान को दुनिया के सामने लाने के लिए इन संग्रहालयों को मंजूरी दी है,” मुंडा ने कहा.

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चूंकि उनके पास इसपर कोई रीसर्च नहीं थी, इसलिए मंत्रालय स्वदेशी स्वतंत्रता आंदोलनों के साथ-साथ आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों का एक संग्रह बनाने पर भी काम कर रहा है. 250 ऐसे आंदोलनों की पहचान की गई है, जिनमें से केंद्र सरकार ने अब 75 ऐसे आंदोलनों का मसौदा तैयार किया है.

इनमें तिलका मांझी (बिहार), निशी विद्रोह (अरुणाचल प्रदेश), और चुआर क्रांति (पश्चिम बंगाल) में आदिवासी विद्रोहों का उल्लेख मसौदे में किया गया है.

इसके अलावा, आदिवासी समुदायों के 250 से ज़्यादा स्वतंत्रता सेनानियों के एक और संग्रह का भी मसौदा तैयार किया जा रहा है.

“हमने ऐसे 600 से ज़्यादा सेनानियों की पहचान की है. लेकिन हम उनमें से सिर्फ़ 250 का ही दस्तावेजीकरण कर सके हैं. संकलन जारी करने से पहले उनके संबंधित समुदायों से उन्हें मान्यता दिलाने का काम अभी जारी है,” अधिकारी ने कहा.

मंत्रालय ने संग्रहालयों को मजबूत करने के लिए वर्कशॉप्स भी आयोजित की हैं. ऐसी ही एक बैठक हाल ही में भोपाल में हुई थी, जबकि दूसरी UNESCO के संबंध में आयोजित की गई थी, जहां संयुक्त राष्ट्र संघ ने उन्हें 10 सिद्धांतों की सूची तैयार करने में मदद की. इन सिद्धांतों में सबसे महत्वपूर्ण है संग्रहालयों के निर्माण में आदिवासी समुदायों और उनकी कला को शामिल करना.

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