छह लाख के ख़र्च पर भिड़े दो विभाग, तो आदिवासी बस्तियों में नहीं पहुंची बिजली

यहां बिछी लाइन इंसुलेटेड (insulated) नहीं है. राज्य के वन विभाग और तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (TANGEDCO) इस बात का समाधान नहीं ढूंढ पा रहे हैं कि इंसुलेटेड बिजली लाइन लगाने में आने वाले छह लाख रुपए के ख़र्च को कौन उठाएगा.

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आनमलई टाइगर रिज़र्व (एटीआर) के अंदर बसी 18 आदिवासी बस्तियों में से एक में भी नियमित बिजली आपूर्ति नहीं है. आप सोच रहे होंगे कि जंगल के अंदर सप्लाई के लिए बिजली की तारें डालना एक चुनौती है. हां, यह बिलकुल सही है, लेकिन बिजली आपूर्ति की कमी की वजह यह नहीं है.

दरअसल, दो विभागों के बीच खर्च को लेकर समझौते की वजह से बात अटकी हुई है. एटीआर के अंदर एक मशहूर पर्यटन स्थल, टॉपस्लिप से सटा एरुमपारई आदिवासी गांव बिजली ट्रांसमिशन लाइन से सटे होने के बावजूद दशकों से बिजली से वंचित हैं.

बस्ती के 34 घरों को बिजली इसलिए नहीं दी जा सकती, क्योंकि यहां बिछी लाइन इंसुलेटेड (insulated) नहीं है. राज्य के वन विभाग और तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (TANGEDCO) इस बात का समाधान नहीं ढूंढ पा रहे हैं कि इंसुलेटेड बिजली लाइन लगाने में आने वाले छह लाख रुपए के ख़र्च को कौन उठाएगा.

कुछ साल पहले, लगभग बस्ती के 24 घरों में बिजली पहुंचाने के लिए सोलर पैनल दिए गए थे, लेकिन रखरखाव की कमी के चलते, कई घर अंधेरे में ही हैं.

स्थानीय निवासी के मुरुगदासन ने शिकायत की कि हर परिवार ने लगभग छह महीने पहले बिजली कनेक्शन के लिए 3,500 रुपये जमा किए लेकिन अब तक कुछ भी ठोस नहीं हुआ है. वो कहते हैं, “बारिश के मौसम में परेशानी बढ़ जाती है जब सौर ऊर्जा नहीं होती. हमारे बच्चे मिट्टी के तेल के दीये की रौशनी में पढ़ते हैं.”

सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत संरक्षित क्षेत्रों में इन्सुलेटेड केबल या ज़मीन के नीचे छिपी केबल के ज़रिए ही बिजली पहुंचाई जा सकती है. ऐसा वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किया गया है.

तमिलनाडु में हाथियों के करंट लगने के मामलों में पिछले कुछ समय में तेजी आई है

इन्हीं दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए एटीआर के उप निदेशक एमजी गणेशन ने उदुमलपेट में TANGEDCO के अधीक्षण अभियंता से एरुमपारई आदिवासी बस्ती को बिजली प्रदान करने के लिए इंसुलेटेड केबल का उपयोग करने का अनुरोध किया. लेकिन TANGEDCO के अधिकारियों ने यह कहा कि उनके नियमों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के साथ सिर्फ़ ओवरहेड लाइनें ही प्रदान की जा सकती हैं.

TANGEDCO ने कहा कि अगर एटीआर के अंदर इंसुलेटेड या अंडरग्राउंड केबल बिछाई जानी है तो उसपर होने वाला छह लाख रुपए का ख़र्च एटीआर को उठाना होगा.

TANGEDCO के एक अधिकारी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “अगर वन विभाग लागत में अंतर को पूरा करने के लिए सहमत होता है, तो TANGEDCO गांव के सभी घरों में घरेलू कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कार्रवाई करेगा.”

तमिलनाडु में हाथियों के करंट लगने के मामलों में पिछले कुछ समय में तेजी आई है, ख़ासतौर से मुदुमलई और मेघमलाई क्षेत्रों में. एटीआर के अधिकारियों ने TANGEDCO से भी अनुरोध किया कि वे जर्जर बिजली लाइनों को ठीक करने के लिए तुरंत एक संयुक्त निरीक्षण करें ताकि हाथी उन तक न पहुंच सकें.

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