द्रौपदी मुर्मू थोड़ी देर में लेंगी देश के सर्वोच्च पद की शपथ

समारोह की पूर्व संध्या पर उनके रिश्तेदारों और समर्थकों में उत्साह का माहैल था. देश के सबसे ऊंचे मुक़ाम पर पहुंचना मुर्मू की आदिवासी जड़ों के लिए एक हाई पॉइंट है. ओडिशा में उनके गांव में ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाने के लिए एक सामुदायिक दावत की योजना बनाई गई है.

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द्रौपदी मुर्मू कुछ ही देर में देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगी. मुर्मू राष्ट्रपति बनने वाली अब तक की सबसे कम उम्र और पहली आदिवासी महिला हैं.

समारोह की पूर्व संध्या पर उनके रिश्तेदारों और समर्थकों में उत्साह का माहैल था. देश के सबसे ऊंचे मुक़ाम पर पहुंचना मुर्मू की आदिवासी जड़ों के लिए एक हाई पॉइंट है. ओडिशा में उनके गांव में ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाने के लिए एक सामुदायिक दावत की योजना बनाई गई है.

मुर्मू के परिवार ने उनकी ताजपोशी के लिए ख़ास तैयारियां की हैं. उनके भाई तरनीसेन टुडू और उनकी पत्नी सकरमणि एक झाल साड़ी, जो एक पारंपरिक संथाली साड़ी होता, उसे ले जा रहे हैं. इस साड़ी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के लिए पक्षियों, मछलियों, फूलों, पत्तियों और जानवरों के रूपांकनों के साथ डिज़ाइन किया गया है.

संथाली महिलाएं हाथ से बुनी हुई इन साड़ियों को ख़ास मौक़ों पर पहनती हैं. परिवार मुर्मू की पसंद की मिठाइयाँ भी साथ ले जा रहा है.

टुडू और सकरमणि के अलावा, मुर्मू की बेटी इतिश्री और दामाद, गणेश भी अपने बचपन के कुछ दोस्तों के साथ शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे.

समारोह में मयूरभंज जिले से भारतीय जनता पार्टी के छह आदिवासी विधायक और ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी की रायरंगपुर शाखा के तीन सदस्य भी शामिल होंगे.

मुर्मू ने अपने पति और दो बेटों की मृत्यु के बाद ब्रह्मकुमारी संस्थानों में राजयोग का अभ्यास करना शुरू किया था.

रविवार को बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक मुर्मू से मिलने पहुंचे, और उन्हें शुभकामनाएं दीं. “मैं बहुत खुश और सम्मानित हूं कि ओडिशा की एक बेटी को भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया है. मैं कल उनके शपथ ग्रहण समारोह में रहूंगा,” पटनायक ने कहा.

शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, धर्मेंद्र प्रधान और विश्वेश्वर टुडू और भाजपा के सात अन्य लोकसभा सांसद भी मौजूद रहेंगे.

द्रौपदी मुर्मू के पैतृक गांव उपरबेड़ा में, ग्रामीणों ने आज पूरे दिन की एक दावत की योजना बनाई है. “पूरा दिन नाच-गाने और दोपहर का भोजन एक साथ करने में बिताएंगे. हम एक बड़ी टीवी स्क्रीन लगाएंगे, ताकि लोग उन्हें शपथ लेते हुए देख सकें. यह हमारे गाँव के लिए सबसे अच्छा दिन है,” एक संथाल ग्रामीण सुनाराम हेम्ब्रम ने मीडिया को बताया.

मुर्मू ने कक्षा 1-7 के बीच उपरबेड़ा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई की थी. पहाड़ापुर में, जहां उन्होंने अपने मृत पति श्याम चरण और दो बेटों लक्ष्मण और सिपुन के नाम पर एक आदिवासी आवासीय विद्यालय स्थापित किया है, वहां भी ग्रामीण लाइव प्रसारण देखने के लिए एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगा रहे हैं.

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