केरल विधानसभा चुनाव: बीजेपी हुई शर्मिंदा, आदिवासी उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने से किया इंकार

मणिकंडन ने अपने फ़ेसबुक पेज पर अंबेडकर को कोट करते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा की. उन्होंने कहा, "भले ही मुझे उल्टा लटका दिया जाए, मैं अपने लोगों को धोखा नहीं दूंगा."

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केरल में भारतीय जनता पार्टी को शर्मिंदा होना पड़ा, जब आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों की सूची की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, मानन्तवाडी के उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया.

वायनाड ज़िले की मानन्तवाडी सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है. बीजेपी ने मानन्तवाडी से पनिया आदिवासी समुदाय के मणिकंडन सी का नाम उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया. हालांकि, मणिकंडन पहले ही पार्टी को सूचित कर चुके थे कि वो चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.

मणिकंडन ने अपने फ़ेसबुक पेज पर अंबेडकर को कोट करते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा की. उन्होंने कहा, “भले ही मुझे उल्टा लटका दिया जाए, मैं अपने लोगों को धोखा नहीं दूंगा.”

मणिकंडन ने अपने फ़ेसबुक पेज पर अंबेडकर को कोट कर कहा, “भले ही मुझे उल्टा लटका दिया जाए, मैं अपने लोगों को धोखा नहीं दूंगा.”

मणिकंडन का कहना है कि वह कांग्रेस, सीपीआई (एम) और बीजेपी तीनों पार्टियों की नीतियों के खिलाफ हैं, क्योंकि वो आदिवासी समुदायों के खिलाफ हैं.

बीजेपी के जिला नेताओं ने मणिकंडन से फ़ोन पर संपर्क कर पूछा था कि क्या वो चुनाव लड़ना चाहते हैं. मणिकंडन का कहना है कि उन्होंने अपना रुख साफ़ किया था और कहा था कि उन्हें चुनावी राजनीति में दिलचस्पी नहीं है.

मणिकंडन का एक और फ़ेसबुक पोस्ट

इसके बावजूद बीजेपी ने उनका नाम घोषित किया. हालांकि मणिकंडन इस बात से खुश हैं कि किसी पार्टी ने पनिया समुदाय से उम्मीदवार चुना.

मणिकंडन ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद केरल पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में एक टीचिंग एसिस्टेंट के रूप में काम करते हैं.

वो अपने ज़िले में आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों में सक्रिय रूप से शामिल हैं. पनिया एक आदिम जनजाति (पीवीटीजी) है, और केरल और तमिल नाडु में नीलगिरी की पहाड़ियों में रहता है.

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