दुर्गम आदिवासी बस्तियों तक पहुंचने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सलाम

कुर्ली ग्राम पंचायत के इन गांवों तक पहुंचना आसान नहीं है – यहां के 23 गांवों में से कम से कम पांच पूरी तरह से दुर्गम हैं. लेकिन उससे भी बड़ी मुश्किल गांव में रंजीता का इंतज़ार कर रही होती है – पीवीटीजी डोंगरिया कोंध आदिवासियों का वैक्सीन का डर.

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कोविड के ख़िलाफ़ जंग में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका कितनी अहम है, यह हम सब अब समझ गए हैं. शहरों के अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर और नर्सें फिर भी लाइमलाइट में रहते हैं, लेकिन उनका क्या जो देश के उन कोनों तक दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाते हैं, जहां गाड़ियां भी नहीं पहुंच पाती हैं.

ऐसी ही एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं 26 साल की रंजीता सबर. पिछले तीन हफ़्तों से रंजीता ओडिशा के रायगड़ा ज़िले के दूरदराज़ के गांवों तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी पैदल तय कर रही हैं.

कुर्ली ग्राम पंचायत के इन गांवों तक पहुंचना आसान नहीं है – यहां के 23 गांवों में से कम से कम पांच पूरी तरह से दुर्गम हैं. लेकिन उससे भी बड़ी मुश्किल गांव में रंजीता का इंतज़ार कर रही होती है – पीवीटीजी डोंगरिया कोंध आदिवासियों का वैक्सीन का डर.

मई की शुरुआत में जब रायगड़ा ज़िले में कोविड के मामले बढ़ने लगे, तो प्रशासन ने कुर्ली में एक वैक्सिनेशन सेंटर स्थापित किया.

शुरुआत में इस सेंटर में ज़्यादा लोग नहीं आए. इसीलिए रंजीता जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता इन आदिवासियों के बीच जाकर वैक्सीन के प्रति उनका डर ख़त्म करने का काम कर रहे हैं.

इस काम में उन्हें सफलता भी मिल रही है. वैक्सिनेशन की दर भले ही धीमी हो, लेकिन अब तक कुर्ली में 45+ आयु वर्ग के 1,160 लोगों में से 40.86 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग चुका है.

इन आदिवासियों को डर था कि वैक्सीन लगाने से उनकी मौत हो जाएगी. इसलिए पहले इलाक़े के नेताओं को वैक्सीन लगाया गया. इसके बाद घर-घर वैक्सिनेशन अभियान शुरु किया गया.

वैक्सीन के डब्बे लेकर पिछले हफ़्ते एक टीम हुंडिज़ली तक 7 किलोमीटर ट्रेकिंग कर पहुंची. वहां से गांव तक पहुंचने में क़रीब चार घंटे का समय और लगा. लेकिन दिन के ख़त्म होने से पहले टीम ने गांव के 45+ आयु वर्ग के 62 लोगों में से 52 को वैक्सीन लगा दिया था.

ग्राम पंचायत में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसमें एक डॉक्टर और एक फ़ार्मासिस्ट है. ऑक्सीजन सपोर्ट वाला सबसे निकटतम कोविड अस्पताल 40 किमी दूर हुंडिज़ली में है.

ओडिशा के 62 आदिवासी समूहों में से 13 को पीवीटीजी के रूप में मान्यता दी गई है. राज्य में 2.9 लाख पीवीटीजी आदिवासी 11 ज़िलों में फैले हुए हैं. अब तक, उनमें से 153 को कोविड हो चुका है, जिनमें से 92 ठीक हो चुके हैं. इनमें अब तक किसी के मरने की ख़बर नहीं है.

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