आदिवासियों को खेती की ओर आकर्षित करने के लिए केरल सरकार की हरित रश्मि योजना

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राज्य में आदिवासी समुदायों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, केरल सरकार के जनजातीय विभाग ने इडुक्की और वायनाड ज़िलों में हरित रश्मि योजना को लागू करने का फ़ैसला किया है.

अनुसूचित जनजातियों के खेती के प्रति आकर्षण को बढ़ाने और उनकी आय और जीवन स्तर को बेहतर करने के मक़सद से इस परियोजना को तैयार किया गया है.

परियोजना के तहत आदिवासी समुदायों की खेती की उपज के लिए उचित बाज़ार भी सुनिश्चित किए जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक़ अन्य ज़िलों में लागू करने से पहले इडुक्की और वायनाड में इसे पायलट परियोजना के तौर पर चलाया जाएगा.

अडिमाली के जनजाति विकास अधिकारी संतोष कुमार एस का कहना है कि परियोजना को आदिवासी विभाग और प्रबंधन विकास केंद्र के सहयोग से लागू किया जाएगा, और इसके तहत चुनिंदा आदिवासी किसानों को बीज, उर्वरक और मज़दूरी दी जाएगा, ताकि पारंपरिक खेती को बढ़ावा मिले.

हरित रश्मि के तहत आदिवासी समुदाय में खेती करने वाली आबादी, उनके उत्पादों और स्वामित्व वाली भूमि के विवरण पर एक सर्वेक्षण भी किया जाएगा. इसके बाद किसान समूह बनाए जाएंगे.

परियोजना के पहले चरण में इडुक्की में एक हज़ार किसानों की मदद करने का प्रस्ताव है. इडुक्की ज़िले के वट्टवड़ा, मरयूर, अडिमाली, मुन्नार और देवीकुलम क्षेत्रों के किसानों को पहले चरण में फ़ायदा होगा. पहली आदिवासी पंचायत, एडमलकुडी को जल्दी ही परियोजना से जोड़ा जाएगा.

इस परियोजना के तहत आदिवासी किसानों को उचित डिस्ट्रीब्युशन सुविधाओं का आश्वासन दिया जाएगा. हर क्षेत्र में ऑर्गैनिक तरीकों से पारंपरिक खेती करने को भी बढ़ावा मिलेगा. सरकार का जनजाति विभाग आदिवासी किसानों से धान और दूसरी उपज इकट्ठा कर, उसे मार्केट भी करेगा.

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