जम्मू-कश्मीर के 400 आदिवासी गांवों में लागू होंगी सरकार की 70 से ज़्यादा कल्याणकारी योजनाएं

आदिवासी मामलों के विभाग ने ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय में, पानी, बुनियादी ढांचे और लिंग से जुड़े मुद्दों समेत कई दूसरे पहलुओं को संबोधित करने के लिए 500 से ज़्यादा आदिवासी आबादी वाले सभी गांवों के लिए ख़ास योजना तैयार की है.

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जम्मू-कश्मीर के आदिवासी इलाक़ों में विकास की गति बढ़ाने के लिए, राज्य सरकार ने 400 आदिवासी गांवों में 70 से ज़्यादा जन कल्याण योजनाएं लागू करने की बात कही है.

अधिकारियों ने कहा कि एकीकृत ग्राम विकास योजना (Integrated Village Development Scheme) के तहत 400 से ज़्यादा आदिवासी गांवों में बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करने के लिए ग्राम योजना के अलावा 98 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान तय किया गया है.

आदिवासी मामलों के विभाग ने ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय में, पानी, बुनियादी ढांचे और लिंग से जुड़े मुद्दों समेत कई दूसरे पहलुओं को संबोधित करने के लिए 500 से ज़्यादा आदिवासी आबादी वाले सभी गांवों के लिए ख़ास योजना तैयार की है.

अधिकारियों ने आईवीडीएस के तहत हर गांव में आजीविका के अवसरों की कमी, वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन की कमी, खराब स्वास्थ्य देखभाल और भूमि के अनुचित उपयोग समेत कई दूसरे मुद्दों की पहचान की है.

एक अधिकारी ने मीडिया को बताया, “यह पहल ग्रामीण परिवारों, ख़ासतौर से वंचित वर्गों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने, स्थायी आजीविका, समृद्ध पर्यावरण, जीवन को बेहतर करना और अच्छे मानवीय मूल्यों को सुनिश्चित करने के नज़रिये से की गई है.”

चुने गए आदिवासी गांवों में 70 से ज़्यादा सरकारी योजनाओं को साथ में लागू करने का प्लान है. इस साल की वार्षिक योजना जम्मू-कश्मीर में आदिवासी समुदायों के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुधन सुधार, युवाओं से जुड़ाव और कौशल विकास के क्षेत्रों में प्रमुख बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि आदिवासी युवा पेशेवर क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें, 500 युवाओं को सरकार की मदद से अलग अलग व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए चुना गया है.

शिक्षा पर ख़ास ध्यान

इसके अलावा आदिवासी बच्चों की आधुनिक शिक्षा तक पहुंच को बेहतर करने के लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये की लागत से 200 स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने की एक परियोजना भी शुरू की है.

साथ ही एकलव्य मॉडल रेंज़िडेंशियल स्कूल (EMRS) स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है. कश्मीर के स्कूली शिक्षा निदेशक तस्सदुक हुसैन मीर ने EMRS की स्थापना के लिए कर्मचारियों की ज़रूरत के आकलन के लिए एक समिति का गठन किया है.

जम्मू कश्मीर के आदिवासी मामलों के विभाग ने कुलगाम और बांदीपोरा जिलों में दो रेज़िडेंशियल स्कूल स्थापित किए हैं, लेकिन इनमें शैक्षणिक सत्र अभी शुरू नहीं हुआ है.

गौरतलब है कि जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने 2010-11 में जम्मू-कश्मीर के लिए आठ एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों को मंजूरी दी थी.

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